कान्हा के 16 विभागीय हाथियों को 6 दिन मिलेगी शाही खातिरदारी
- कान्हा टाइगर रिजर्व में 15 सितंबर से हाथी रिजुविनेशन कैंप का आयोजन
- साल भर की सेवा के बदले मिलेगा भरपूर आराम, महावतों का भी होगा प्रशिक्षण
मंडला महावीर न्यूज 29. विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में वन और वन्यजीव संरक्षण में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले विभागीय हाथियों के लिए एक विशेष आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। साल भर दिन-रात अपनी सेवाएं देने वाले इन विशालकाय वन रक्षकों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कान्हा प्रबंधन द्वारा 15 से 20 सितंबर तक परिक्षेत्र सुपखार में हाथियों के पुनर्यौवन (रिजुविनेशन) कैंप का आयोजन किया जा रहा है। यह 6 दिवसीय विशेष कैंप हाथियों द्वारा वर्ष भर किए गए उत्कृष्ट कार्यों और जंगल की सुरक्षा में दिए गए उनके निरंतर सहयोग के प्रति वन विभाग का आभार प्रदर्शित करने का एक अनूठा तरीका है।
कान्हा में 16 हाथियों का कुनबा, मानसून गश्ती में निभाते हैं अहम भूमिका
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में 16 विभागीय हाथी मौजूद हैं, जिनमें 9 नर, 6 मादा और एक नवजात हाथी का बच्चा शामिल है। कान्हा की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में इन हाथियों की उपयोगिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनका उपयोग मुख्य रूप से सघन वन्यजीव संरक्षण, गश्ती, वन्यजीवों के मॉनिटरिंग और बाघों व अन्य वन्यजीवों के ट्रांसलोकेशन जैसे जटिल कार्यों में किया जाता है। विशेषकर मानसून के दौरान जब भारी बारिश के कारण जंगल के भीतरी हिस्सों में वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो जाती है, तब ये विभागीय हाथी ही वन अमले की सबसे बड़ी ताकत बनते हैं और गश्ती का सबसे प्रमुख साधन होते हैं।
कैंप का उद्देश्य, आराम, बेहतर आहार और सामाजिक जुड़ाव
इस पुनर्यौवन कैंप का मुख्य उद्देश्य हाथियों को उनके नियमित और थकाऊ कार्यों से दूर एक शांत वातावरण में पर्याप्त आराम देना है। अमूमन अलग-अलग कैंपों और बीटों में तैनात रहने वाले सभी हाथियों को इस आयोजन के दौरान एक साथ रहने, खाने और विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों में शामिल होने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों ने बतया कि अपने कुनबे के साथ समय बिताना और सामाजिक व्यवहार करना हाथियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक होता है और इससे उनका तनाव कम होता है।
रोजाना होगी मालिश, वन्यजीव चिकित्सक करेंगे फुल बॉडी चेकअप
कैंप के दौरान इन हाथियों को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जाएगा। इनकी दैनिक दिनचर्या में प्रात: काल जंगल से लाकर नहलाना और फिर उनके शरीर व पैरों की विशेष मालिश करना शामिल होगा। हाथियों को उनकी पसंद का विशेष और पौष्टिक आहार परोसा जाएगा। इसके साथ ही वन्यजीव चिकित्सकों द्वारा उनका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। स्वास्थ्य जांच के तहत हाथियों के रक्त, मल और मूत्र के नमूने लेकर आवश्यक परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भी भेजे जाएंगे। सभी हाथियों का शारीरिक माप भी निर्धारित प्रपत्र में दर्ज किया जाएगा। दोपहर के समय महावत एवं चाराकटरों के साथ खेल गतिविधियां होंगी और शाम को भोजन कराकर उन्हें पुन: जंगल में स्वतंत्र रूप से छोड़ दिया जाएगा।
आपात स्थितियों से निपटने महावतों को भी मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
यह कैंप केवल हाथियों के आराम के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी देखभाल करने वाले स्टाफ के कौशल विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। कैंप के दौरान महावतों और चाराकटरों के प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। विभाग के वरिष्ठ और अनुभवी महावतों द्वारा अन्य युवा महावतों एवं चाराकटरों को हाथियों के सुरक्षित रखरखाव और उन्हें दिए जाने वाले निर्देशों के संबंध में बारीकियां सिखाई जाएंगी। इस प्रशिक्षण से हाथियों के बेहतर प्रबंधन के साथ किसी भी आपात स्थिति में उन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में काफी सहायता मिलेगी। कान्हा टाईगर रिजर्व के बफर परिक्षेत्र डीएफओ आशीष कुमार पांडे ने बताया कि कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन हाथियों के संरक्षण और उनके कल्याण को हमेशा से अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखता आया है। इसी कड़ी में हाथियों को तरोताजा और स्वस्थ रखने वाले इस शानदार पुनर्यौवन कैंप का आयोजन पिछले 16 वर्षों से लगातार किया जा रहा है।









