आजादी के 80 साल बाद भी सड़क को तरस रहा घुघरी का भिलवाटोला, छींदीटोला
मरीजों को खाट पर ढोने की मजबूरी, बदहाल रास्तों से टूट रहे रिश्ते
- विकास के दावों की खुली पोल
- आक्रोशित युवाओं ने दी चक्काजाम की चेतावनी
मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में विकास के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। जनपद पंचायत घुघरी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चूरिया के आश्रित ग्राम भिलवाटोला में आजादी के 80 साल बाद भी पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। सड़क के अभाव में ग्रामीण आज भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की इस अनदेखी के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। हाल ही में आईटी सेल विधानसभा अध्यक्ष मनोज सोनवानी ने गांव का दौरा कर ग्रामीणों की इस पीड़ा को सुना और उनकी आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया।
कीचड़ में सने नौनिहालों का भविष्य
गांव में सड़क न होने का सबसे बड़ा खामियाजा स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में कच्चा रास्ता पूरी तरह से कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चे आए दिन इस कीचड़ में फिसलकर गिरते हैं, जिससे उनके कपड़े तो खराब होते ही हैं, साथ ही उन्हें चोटें भी आती हैं। ग्रामीणों का दर्द है कि सरकार ने बच्चों को स्कूल जाने के लिए साइकिलें तो बांट दी हैं, लेकिन जब गांव तक पहुंचने के लिए कोई सुरक्षित रास्ता ही नहीं है, तो उन साइकिलों का क्या औचित्य रह जाता है।
स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल, एंबुलेंस के लिए तरसते ग्रामीण
बदहाल रास्तों के कारण गांव में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। आपात स्थिति में किसी गंभीर बीमारी या महिलाओं को प्रसव पीड़ा होने की स्थिति में गांव तक कोई भी चार पहिया वाहन या एंबुलेंस पहुंचने को तैयार नहीं होती। वाहन चालकों के साफ मना करने पर परिजनों को मजबूरन मरीजों और गर्भवती महिलाओं को पीठ पर लादकर या गोद में उठाकर कई किलोमीटर दूर पक्की सड़क तक ले जाना पड़ता है। इस दौरान मरीज की जान पर जो संकट मंडराता है, वह परिवारों के लिए किसी दुखों के पहाड़ टूटने से कम नहीं होता।
खराब रास्तों के कारण टूट रहे शादी के रिश्ते
सड़क की इस बदहाली का सीधा असर अब ग्रामीणों के सामाजिक और वैवाहिक जीवन पर भी पडऩे लगा है। ग्रामीणों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि जब भी कोई बाहरी परिवार रिश्ते के लिए उनके गांव आता है, तो रास्ते की दुर्दशा देखकर ही वह रिश्ता करने से इंकार कर देता है। सड़क अब सिर्फ आवागमन का साधन नहीं रह गई है, बल्कि इसके कारण बच्चों का भविष्य, स्वास्थ्य सुविधाएं और गांव का पूरा सामाजिक ताना-बाना बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।
युवाओं का अल्टीमेटम और चक्काजाम की चेतावनी
लगातार जनसुनवाई, जनपद और पंचायत स्तर पर कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद जब समाधान नहीं हुआ, तो भिलवाटोला के युवा वर्ग ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी सड़क निर्माण की मांग पूरी नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करेंगे। इस दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। मौके पर पहुंचे मनोज सोनवानी ने युवाओं को आश्वस्त किया कि उनकी इस मांग को स्थानीय विधायक नारायण सिंह पट्टा के समक्ष प्रमुखता से रखा जाएगा और उचित कार्रवाई के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
छींदीटोला में भी बदहाली, सड़क मरम्मत के भुगतान पर उठे सवाल
बताया गया कि ग्राम पंचायत चूरिया के छींदीटोला के भी यहीं हाल है। यहां के ग्रामीण भी वर्षों से सड़क की खस्ताहाल स्थिति से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पूर्व में सड़क मरम्मत का जो कार्य किया गया था, उसका भुगतान आज तक नहीं हुआ है। इस स्थिति ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिले के आदिवासी अंचलों में दो-तीन किलोमीटर के इन संपर्क मार्गों को पक्की सड़क में तब्दील करने के लिए स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधि का ध्यान ही नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि क्या हम यूं ही अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करते रहेंगे।









