तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव
जोसेफ विजय का ‘द्रविड़ गढ़’ में उदय
- दशकों पुराना DMK-AIADMK वर्चस्व टूटा
- 9वें मुख्यमंत्री बने टीवीके प्रमुख विजय
मंडला महावीर न्यूज 29. तमिलनाडु की सियासत में दशकों से चले आ रहे द्रविड़ राजनीति के द्विध्रुवीय वर्चस्व को पीछे छोड़ते हुए अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) ने सत्ता के शिखर पर अपनी जगह बना ली है। 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके 107 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। रविवार को विजय ने तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। उनके साथ नौ मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की।
राज्यपाल और सत्ता संघर्ष की चुनौतियां
चुनाव परिणामों के बाद सरकार गठन की राह आसान नहीं थी। राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने शुरुआत में विजय के सरकार बनाने के दावे को खारिज कर दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई। इस बीच प्रतिद्वंद्वी दलों डीएमके और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट से जनादेश के विरुद्ध सरकार बनाने की कोशिशें भी हुईं, जिसके चलते राज्य में राष्ट्रपति शासन की चर्चा होने लगी थी। अंततः राहुल गांधी की मध्यस्थता और कांग्रेस, लेफ्ट, वीसीके एवं आईयूएमएल के समर्थन से विजय ने 121 विधायकों का बहुमत जुटाया और सरकार बनाने का रास्ता साफ हुआ।
द्रविड़ राजनीति के 110 साल और एआईएडीएमके का पतन
तमिलनाडु की राजनीति का सफर 1916 में जस्टिस पार्टी की स्थापना से शुरू हुआ था, जो ब्राह्मण वर्चस्व के खिलाफ गैर-ब्राह्मण आंदोलन था। 1967 में अन्नादुरई के नेतृत्व में पहली बार क्षेत्रीय दल ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया। तब से लेकर अब तक सत्ता केवल एम. करुणानिधि (DMK) और एम.जी. रामचंद्रन व जयललिता (AIADMK) के इर्द-गिर्द घूमती रही। इस बार के चुनाव में एआईएडीएमके का वोट शेयर 12 प्रतिशत गिरा है और वह तीसरे नंबर पर खिसक गई है।
युवा शक्ति और ‘सर्वसमावेशी’ विचारधारा
विजय का उदय केवल स्टारडम की घटना नहीं, बल्कि राज्य के युवाओं की बदलती अपेक्षाओं का परिणाम है। टीवीके ने खुद को द्रविड़ पहचान, सामाजिक न्याय और तमिल अस्मिता से जोड़ते हुए एक ‘सर्वसमावेशी’ छवि पेश की है। विजय ने अपनी फिल्मों के जरिए भ्रष्टाचार विरोध और सुशासन के जिन मुद्दों को उठाया था, उन्हें अब धरातल पर उतारने की चुनौती उनके सामने है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे केवल एक चेहरे की पार्टी के बजाय टीवीके को एक मजबूत “संगठन आधारित पार्टी” के रूप में कैसे विकसित करते हैं और विभिन्न समुदायों के बीच जातीय संतुलन को कैसे साधते हैं।









