मलमास: खगोलीय संतुलन या धार्मिक वर्जना? जानिए क्यों हर तीन साल में आता है ‘अधिक मास’
- त्योहारों और मौसम के तालमेल के लिए जरूरी है यह माह
- 13 का अंक और शुभ कार्यों पर रोक के पीछे का तर्क
मंडला महावीर न्यूज 29. हिंदू पंचांग में ‘अधिक मास’, जिसे ‘मलमास’ या ‘पुरुषोत्तम मास’ भी कहा जाता है, एक विशेष कालखंड है। आखिर यह महीना क्यों आता है और इसका हमारे जीवन एवं धर्म पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस विषय पर ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप ज्योतिषी ने विस्तार से प्रकाश डाला है।
सूर्य और चंद्रमा के बीच समय का संतुलन
पंडित संदीप ज्योतिषी के अनुसार, सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष की अवधि में अंतर होने के कारण मलमास की स्थिति बनती है। सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है, जबकि चंद्र वर्ष 354 दिनों का। इस प्रकार हर साल 11 दिनों का अंतर बढ़ता जाता है। यही समय लगभग 32 महीने, 16 दिन और 4 घड़ी के बाद एक पूरे महीने के बराबर हो जाता है। खगोलीय गणना को संतुलित करने के लिए पंचांग में इस अतिरिक्त महीने को जोड़ा जाता है। यदि यह संतुलन न हो, तो हमारे त्योहार अपने तय मौसम से भटक जाएंगे। मलमास के कारण ही होली और दिवाली जैसे त्योहार हमेशा अपने निश्चित मौसम में ही पड़ते हैं।
13 का अंक और शुभ कार्यों की वर्जना
धार्मिक मान्यताओं में 13 के अंक को अक्सर संघर्ष और अशुभता से जोड़कर देखा जाता है। पंडित संदीप ने बताया कि मलमास वर्ष का 13वां महीना होता है। चूंकि 13वीं तिथि या 13 नंबर को मृत्यु और दुख के शोक (जैसे 13वीं संस्कार) से संबंधित माना गया है, इसलिए खुद को इन नकारात्मक प्रभावों से दूर रखने के लिए इस महीने में शुभ कार्यों पर रोक लगाई गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक या व्यावहारिक दृष्टि से शुभ कार्य करने में कोई समस्या नहीं है, यदि व्यक्ति का मस्तिष्क ’13’ के अंक के भय से मुक्त है। सब कुछ हमारे मस्तिष्क के नियंत्रण और विश्वास पर निर्भर करता है।

क्या करें और क्या न करें?
शास्त्रों के अनुसार, मलमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, जनेऊ संस्कार और नए व्यापार की शुरुआत वर्जित मानी गई है। माना जाता है कि इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। हालांकि, यह समय आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य, जप और तप के लिए सर्वोत्तम माना गया है। लोग इस अवधि में ईश्वर की प्रार्थना को प्राथमिकता देते हैं और मलमास समाप्त होने के बाद ही मांगलिक कार्यों को पुनः शुरू करते हैं।









