नर्मदा परिक्रमा पथ की बदहाली
पत्थरों पर नंगे पांव चलने को मजबूर परिक्रमावासी
- बड़झर से औढ़ारी के बीच 4 किमी सड़क निर्माण की मांग
- क्षेत्रीय ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों के प्रति आक्रोश
मंडला महावीर न्यूज 29. प्रदेश सरकार भले ही हर गांव को पक्की सड़क से जोडऩे का दावा करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी दावों से कोसों दूर है। निवास विकासखंड के अंतर्गत मोहगांव ब्लॉक के सिंगारपुर और चकदेही को जोडऩे वाला बड़झर से औढ़ारी मार्ग आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। लगभग चार किलोमीटर का यह हिस्सा डामरीकरण के अभाव में बड़े-बड़े पत्थरों और बोल्डरों में तब्दील हो चुका है, जिससे न केवल ग्रामीण बल्कि नर्मदा परिक्रमावासी भी भारी कष्ट झेल रहे हैं।
परिक्रमावासियों के पांव हो रहे छलनी
यह मार्ग नर्मदा तट के समीप स्थित होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण नर्मदा परिक्रमा पथ का हिस्सा है। यहाँ से प्रतिदिन दर्जनों परिक्रमावासी गुजरते हैं। आस्था के चलते अधिकतर श्रद्धालु नंगे पैर ही यात्रा पूर्ण करते हैं। ऊबड़-खाबड़ और नुकीले पत्थरों वाले इस रास्ते पर चलने से श्रद्धालुओं के पैर छलनी हो रहे हैं। राहगीरों का कहना है कि यह मार्ग साधना की जगह शारीरिक प्रताडऩा का केंद्र बनता जा रहा है।
सालों से सिर्फ मिल रहा आश्वासन
क्षेत्रीय ग्रामीण हेमराज मसराम और समाजसेवी पीडी खैरवार ने बताया कि इस सड़क के डामरीकरण के लिए ग्रामीण वर्षों से गुहार लगा रहे हैं। दर्जनों गांवों की आवाजाही इसी व्यस्त मार्ग से होती है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
जनप्रतिनिधियों पर उठ रहे सवाल
सड़क निर्माण में हो रही देरी से क्षेत्रवासियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि गुणवत्ताविहीन निर्माण एजेंसियों के कारण कई मार्ग बनते ही उखड़ रहे हैं, जबकि इस महत्वपूर्ण मार्ग पर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है। क्षेत्र के लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि परिक्रमावासियों और आम जनों की सुविधा को देखते हुए इस चार किलोमीटर के टुकड़े का जल्द से जल्द पक्का निर्माण कराया जाए, अन्यथा ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।










