17 मई से अधिकमास का प्रारंभ
एक माह तक मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम
- भगवान पुरुषोत्तम की भक्ति के लिए श्रेष्ठ है यह माह
- 15 जून तक वर्जित रहेंगे शुभ कार्य
मंडला महावीर न्यूज 29. हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाले अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) की शुरुआत इस वर्ष 17 मई से हो रही है, जो 15 जून तक चलेगा। लगभग एक माह की इस अवधि में विवाह, सगाई, जनेऊ, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य पूर्णत: वर्जित रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह समय सांसारिक गतिविधियों के बजाय आध्यात्मिक साधना और भक्ति के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
12 के स्थान पर होंगे 13 माह
वरदान आश्रम के पंडित नीलू महाराज ने बताया कि विक्रम संवत 2083 में इस वर्ष 12 के स्थान पर 13 माह होंगे। चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच के अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीन वर्ष में अधिकमास आता है। चूंकि इस मास में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती, इसलिए इसे संक्रांति-विहीन या मलमास भी कहा जाता है। इस दौरान नया व्यवसाय शुरू करना या वाहन-मकान खरीदना भी शुभ नहीं माना जाता।
दान-पुण्य और उपासना का विशेष महत्व
धर्मशास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु ने स्वयं इस मास को अपना नाम पुरुषोत्तम दिया है। पंडित नीलू महाराज ने बताया कि इस माह में व्रत, जप, तप, हवन और भागवत कथा श्रवण का विशेष पुण्य मिलता है। दीपदान करने से सुख-समृद्धि और लक्ष्मी कृपा प्राप्त होती है। इसे केवल निषेध का समय न मानकर आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर माना जाना चाहिए।











