आरबीएसके के प्रयासों से संवरी दो मासूमों की मुस्कान

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आरबीएसके के प्रयासों से संवरी दो मासूमों की मुस्कान

जन्मजात विकृति से मुक्त हुए दो नन्हे बच्चे

  • कटे होंठ और फटे तालु की समस्या का सफल ऑपरेशन
  • बच्चों को मिला नया जीवन

मंडला महावीर न्यूज 29. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ग्रामीण क्षेत्रों में उन मासूमों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो जन्मजात शारीरिक कमियों के कारण सामान्य जीवन जीने से वंचित रह जाते हैं। हाल ही में निवास ब्लॉक के अंतर्गत दो मासूम बच्चों के सफल ऑपरेशन ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता और सार्थकता को सिद्ध किया है।जानकारी अनुसार मंडला जिले के निवास विकासखंड से एक ऐसी सुखद तस्वीर सामने आई है, जो स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भरोसे को और मजबूत करती है। ग्राम लोहारी की 4 माह की मासूम संजनी बरकड़े जो जन्म से ही कटे होंठ और फटे तालु जैसी गंभीर समस्या से जूझ रही थी, वहीं प्रयाग जन्म से ही फटे तालु की समस्या से जूझ रहा था। लेकिन दोनों की सफल सर्जरी के बाद अब एक सामान्य और खुशहाल जीवन की ओर कदम बढ़ा चुकी है।

केस -1

10 माह के प्रयाग को मिली नई पहचान 

ग्राम बम्हनी माल (भटगांव) के निवासी मनमोहन तेकाम का 10 माह का पुत्र प्रयाग जन्म से ही फटे तालु की समस्या से जूझ रहा था। जानकारी के अभाव में परिजन इसे एक सामान्य स्थिति मान रहे थे। ग्राम भ्रमण के दौरान आरबीएसके टीम की नजर प्रयाग पर पड़ी। टीम ने न केवल इस समस्या की गंभीरता को पहचाना, बल्कि परिजनों की काउंसलिंग कर उन्हें इलाज के लिए प्रेरित किया। इसके बाद 14 अप्रैल 2026 को जबलपुर के दुबे सर्जिकल क्लिनिक में प्रयाग की प्राइमरी पैलेटोप्लास्टी सर्जरी पूरी तरह निःशुल्क की गई। अब प्रयाग पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य बच्चों की तरह दिख रहा है।

केस – 2

संजनी की वंशानुगत बीमारी पर मिली जीत 

इसी प्रकार ग्राम लोहारी की 4 माह की बालिका संजनी पिता अमरजीत बरकडे जन्म से ही कटे होंठ और फटे तालु की समस्या से ग्रसित थी। यह समस्या उनके परिवार में वंशानुगत थी, जिससे परिजन काफी चिंतित थे। आरबीएसके टीम ने जन्म के समय से ही बच्ची की निगरानी रखी और सही समय आने पर 26 मार्च 2026 को उसकी प्राइमरी चीलोप्लास्टी सर्जरी करवाई। आज संजनी के होंठ सामान्य हैं और उसकी मुस्कान देख परिजन भावुक और प्रसन्न हैं।

टीम का रहा विशेष योगदान 

यह सफल उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र निवास के बीएमओ डॉ. विजय पैगवार के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस नेक कार्य में डॉ. अजय कुमार खांडेल, डॉ. मनोरमा पाण्डेय और एएनएम शुभा पाण्डेय की सक्रिय भूमिका और समर्पण सराहनीय रहा। आरबीएसके टीम की यह तत्परता न केवल बच्चों को शारीरिक कष्ट से मुक्ति दिला रही है, बल्कि समाज के गरीब तबके का आर्थिक बोझ भी कम कर रही है। इन बच्चों की मुस्कान ही इस कार्यक्रम की असली सफलता है।

चुनौतीपूर्ण थी राह 

संजनी के परिजनों के लिए यह केवल एक शारीरिक विकृति नहीं, बल्कि एक मानसिक और सामाजिक चिंता का विषय था। जन्मजात कटे होंठ के कारण बच्ची को दूध पीने में अत्यधिक समस्या हो रही थी, जिससे उसके पोषण और विकास पर खतरा मंडरा रहा था। यह समस्या परिवार में वंशानुगत होने के कारण चिंता और भी गहरी थी। इस मुश्किल घड़ी में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम संजनी के लिए मसीहा बनकर उभरी। सीएमएचओ डॉ. डीजे मोहंती के निर्देशन में टीम ने न केवल बच्ची को चिन्हित किया, बल्कि संजनी के माता-पिता की निरंतर काउंसलिंग भी की। टीम ने उन्हें समझाया कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति से यह पूरी तरह ठीक हो सकता है।

इनका कहना है

ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण अक्सर बच्चे इन विकृतियों के साथ बड़े हो जाते हैं। हमारा उद्देश्य हर उस बच्चे तक पहुँचना है जिसे उपचार की आवश्यकता है।
डॉ. अजय कुमार खांडेल, आरबीएसके, निवास

आरबीएसके टीम के मार्गदर्शन में संजनी को जबलपुर के विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कराया गया। 26 मार्च 2026 को विशेषज्ञों द्वारा उसकी सफल सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद अब संजनी के होंठ सामान्य बच्चों की तरह हो गए हैं। जब हमने पहली बार संजनी को ऑपरेशन के बाद देखा, तो हमारी आँखों में खुशी के आँसू थे। सरकारी योजना ने हमारी बच्ची को एक नया जीवन और सुंदर चेहरा दिया है।
अमरजीत बरकडे, संजनी के पिता



 

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