सिमरिया में त्राहि-त्राहि: बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण
गंदा पानी छानकर पीने की मजबूरी ने रोका रास्ता
- जलसंकट का दंश
- 4 साल से तैयार खड़ी टंकी
- घरों तक पाइप भी बिछे, पर सिमरिया के नलों में आज तक नहीं पहुँचा पानी
- गंदे नाले का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण सड़क पर बैठे,
- बर्तन और दूषित जल लेकर चक्काजाम कर जताया विरोध
मंडला महावीर न्यूज 29 | नैनपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत कजरवाड़ा के पोषक ग्राम सिमरिया में पेयजल की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। यहाँ के आदिवासी ग्रामीण वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, लेकिन अब पानी की किल्लत ने उनके सब्र का बांध तोड़ दिया है। गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, बर्तनों में गंदा पानी लेकर सड़क के बीचों-बीच बैठ गए और चक्काजाम कर दिया।
दूषित जल और बीमारी का डर
ग्रामीणों का दर्द है कि उन्हें पीने के पानी के लिए करीब 2 किलोमीटर दूर तक भटकना पड़ता है। जो पानी उपलब्ध है, वह भी नाले जैसा गंदा और बदबूदार है। मजबूरी में ग्रामीण इस दूषित पानी को कपड़े से छानकर और उबालकर पीते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि “गंदा पानी पीने से बच्चे लगातार बीमार पड़ रहे हैं। हमने कलेक्टर से लेकर मंत्री तक गुहार लगाई, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।”
करोड़ों का ढांचा बना सफेद हाथी
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के पास पिछले 4 सालों से पानी की टंकी बनकर तैयार खड़ी है और गलियों में पाइपलाइन भी बिछी है, लेकिन आज तक एक बूंद पानी सप्लाई नहीं किया गया। उचित रख-रखाव के अभाव में अब यह सरकारी ढांचा भी जर्जर होने लगा है।
तहसीलदार और पीएचई अमला पहुँचा मौके पर
चक्काजाम की खबर मिलते ही नैनपुर तहसीलदार पूजा राणा राजस्व और पीएचई (PHE) विभाग के अमले के साथ मौके पर पहुँचीं। उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा कर वस्तुस्थिति का जायजा लिया। तहसीलदार ने बताया कि यहाँ पूर्व में बोर खनन किया गया था, लेकिन ग्राउंड वाटर लेवल कम होने के कारण सफलता नहीं मिली। अब वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर पास के ‘मुर्गा टोला’ से सिमरिया तक पानी लाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
मजदूरी छोड़ पानी के लिए संघर्ष
पूरी तरह मजदूरी पर आश्रित इस गांव के लोग दिनभर मेहनत करने के बाद शाम को पानी के लिए लंबी कतारों में लगने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ‘मुर्गा टोला’ से पानी लाने की व्यवस्था शुरू नहीं हुई, तो वे पुनः उग्र आंदोलन करेंगे।










