मां के हौसले ने देश को दिया गोल्ड

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तरूण कुमार ने जीत का अंतिम गोल करके भारत को दिलाया गोल्ड

  • मां के हौसले ने देश को दिया गोल्ड
  • दिव्यांग छात्र तरुण कुमार ने कर दिखाया कारनामा
  • दिव्यांग अंतर्राष्ट्रीय गोथिया कप में भारत को दिलाई 4-3 से विजयश्री
  • बचपन से ही तरुण को फुटबॉल खेल में थी रुचि
  • तंखा मेमोरियल दिव्यांग स्कूल में है 10 वीं का छात्र

मंडला महावीर न्यूज 29. जब कुछ करने की ठान लेते है, तो कुछ भी असंभव नहीं होता है। अगर लगन हो और कुछ कर गुजरने की जिद् हो तो सफलता जरूर कदम चूमती है, यही कर दिखाया 27 मार्च 2004 को जन्मे जबलपुर जिले के तरूण कुमार ने, जो बचपन से ही बोलने में असमर्थ है, लेकिन कुछ कर दिखाने की चाह, मेहनत, लगन, हौसले और संघर्ष ने ऐसा कारनामा करके दिखाया कि तरूण कुमार ने अंतर्राष्ट्रीय गोथिया कप में भारत को गोल्ड दिला दिया। तरूण कुमार जबलपुर के तंखा मेमोरियल दिव्यांग स्कूल के छात्र है।

जानकारी अनुसार तरुण कुमार जबलपुर रांझी के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते है, तरुण कुमार बचपन से ही बोलने में असमर्थ है, दिव्यांग होने के कारण तरुण को बचपन से ही पिता का साथ नही मिला। तरुण बचपन से ही अपनी मां के साथ नाना नानी के घर में रहते है। बचपन से ही तरुण को फुटबॉल खेल में रुचि थी। उसे फुटबॉल खेलना काफी पंसद था। इसके साथ ही तरूण कुमार जबलपुर के तंखा मेमोरियल दिव्यांग स्कूल में 10 वी के छात्र भी है।

बताया गया कि तंखा मेमोरियल दिव्यांग स्कूल के प्रयासों से तरूण कुमार ग्वालियर में आयोजित राष्ट्रीय दिव्यांग फुटबॉल प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। तरूण के बेहतर प्रदर्शन के कारण उसका चयन स्वीडन में आयोजित दिव्यांग अंतर्राष्ट्रीय गोथिया कप में हो गया। जहां तरूण इस प्रतियोगिता में भाग लेने स्वीडन पहुंचा। जहां आयोजित गोथिया कप में फाइनल मुकाबला भारत और डेनमार्क के मध्य हुआ। जिसमें दोनो देश ने 3-3 गोल से बराबर में चल रहे थे। अंतिम कुछ ही मिनट बचे थे तब तरुण कुमार ने जीत का अंतिम गोल करके गोल्ड मेडल भारत की झोली में डाल दिया और भारत 4-3 से विजयी हुआ।

भारत को गोल्ड दिलाकर तरुण ने जबलपुर संस्कारधानी मध्यप्रदेश और पूरे देश का नाम गौरवान्वित किया है। तरुण कुमार आज मंगलवार को गृह नगर जबलपुर लौटे, जहां जगह जगह रैली निकालकर स्वागत किया गया। तरूण की इस सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। तरुण कुमार के घर लौटने पर उनकी मां संगीता ठाकुर, नाना गणेश प्रसाद ठाकुर, नानी श्रीमती तारा बाई, मामा देवेंद्र कुमार, मामी अरुणा ठाकुर और परिवार के दक्ष प्रधान, पलक प्रधान, शकुन प्रधान, बंशी लाल, राहुल प्रधान, महेश भलावी, कोमल उद्दे समेत मोहल्ला वासियों में खुशी का ठिकाना नही रहा। इस उपलब्धि का श्रेय तरूण कुमार ने अपनी मां, नाना नानी, मामा मामी, तंखा स्कूल के संचालक, प्राचार्य, समस्त शिक्षक, टीम के साथी, अपने कोच एवं उसकी सफलता में सहायक समस्त लोगो को दिया है।

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