शरद पूर्णिमा आज
16 कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा बरसाएगा अमृत
- आरोग्य प्राप्ति के लिए रातभर खुले आसमान के नीचे रखी जाएगी खीर
- मंडला के मंदिरों में गूंजेंगे भजन
- आज ही के दिन हुआ था मां लक्ष्मी का प्राकट्य
- पूजा से मिलेगी सुख-समृद्धि
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले भर में आज (25 अक्टूबर) शरद पूर्णिमा का पावन पर्व पूरी श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाने की व्यापक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। हिंदू पंचांग और सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। इस पूर्णिमा को ‘अमृत वर्षा की रात’ के रूप में भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे वर्ष में केवल शरद पूर्णिमा की रात ही ऐसा अवसर होता है जब चंद्रमा अपनी पूर्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस रात चंद्रमा की दूधिया किरणों से पृथ्वी पर अमृत की वर्षा होती है, जो मनुष्य के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
खीर रखने की परंपरा और आरोग्य की प्राप्ति
पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ज्योतिषाचार्य पंडित विजयानंद शास्त्री ने बताया कि पुरातन मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा सबसे अधिक शक्तिशाली स्थिति में होता है। इस विशेष अवसर पर घरों में खीर बनाने की शाश्वत परंपरा है। आज शाम को श्रद्धालु पारंपरिक रूप से खीर का प्रसाद तैयार करेंगे और उसे रात भर खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की शीतल रोशनी में रखा जाएगा। मान्यता है कि किरणों से बरसने वाला अमृत सीधे खीर में समाहित हो जाता है। ब्रह्म मुहूर्त में या अगले दिन सुबह इस खीर का प्रसाद के रूप में सेवन करने से शरीर को अद्भुत औषधीय गुण प्राप्त होते हैं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, श्वास संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को आरोग्य के साथ-साथ धन लाभ भी प्राप्त होता है।
मंदिरों में होंगे विशेष आयोजन
शरद पूर्णिमा के अवसर पर मंडला नगर सहित ग्रामीण अंचलों के मंदिरों में विशेष उल्लास देखने को मिलेगा। विशेष रूप से राधा-कृष्ण और राम-जानकी मंदिरों में आकर्षक साज-सज्जा की गई है। यहां रात भर विशेष धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक रास लीलाओं का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तगण शामिल होकर धर्म लाभ अर्जित करेंगे।
मां लक्ष्मी का हुआ था प्राकट्य
यह दिन धन और ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी से भी गहराई से जुड़ा है। पंडित विजयानंद शास्त्री के अनुसार, इसी पवित्र दिन समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण के लिए आती हैं। इस दिन पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पूजा में विशेष रूप से ‘सुपारी’ का उपयोग करने का विधान है। ऐसा करने से मां कमला प्रसन्न होती हैं, व्यक्ति के जीवन में कभी धन-धान्य की कमी नहीं रहती और परिवार में सुख-समृद्धि व शांति का वास होता है।









