नाबार्ड और प्रदान की अभिनव पहल
जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय में निवास के किसानों ने सीखी उन्नत खेती की तकनीकें
- पायलीबहुर के किसानों को मिला कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन
- कार्यशाला में खेती को लाभ का धंधा बनाने पर हुआ मंथन
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के निवास विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पायलीबहुर के किसानों ने कृषि के क्षेत्र में नवाचार और वैज्ञानिक तरीके अपनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) एवं प्रदान (PRADAN) संस्था के संयुक्त तत्वावधान में जबलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV) में किसानों और ग्रामीण समुदाय के लिए ‘उन्नत कृषि’ विषय पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस भ्रमण और कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक खेती के तौर-तरीकों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से रूबरू कराकर उनकी आजीविका और कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देना था।

वैज्ञानिकों से जानीं मिट्टी और जल संरक्षण की बारीकियां
कार्यशाला के दौरान कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों ने किसानों को सीधा मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रतिभागियों को उन्नत कृषि पद्धतियों, मृदा (मिट्टी) स्वास्थ्य, जल संरक्षण, फसल प्रबंधन और कृषि की नवीन तकनीकों के महत्व को गहराई से समझने का अवसर मिला। सत्र के दौरान किसानों ने कृषि संबंधी विभिन्न विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की तथा विशेषज्ञों के सामने अपनी शंकाएं रखकर उनका समाधान प्राप्त किया। साथ ही, किसानों ने अपने जमीनी अनुभव भी वैज्ञानिकों के साथ साझा किए।

पारंपरिक खेती से वैज्ञानिक दृष्टिकोण की ओर कदम
नाबार्ड समर्थित वॉटरशेड परियोजना के तहत आयोजित इस क्षमता-विकास गतिविधि का मूल उद्देश्य ग्रामीण किसानों को पारंपरिक खेती के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। विशेषज्ञों ने बताया कि वैज्ञानिक तरीकों से न केवल उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है, बल्कि खेती की लागत कम करने में भी भारी मदद मिलती है, जिससे अंततः कृषि आय में वृद्धि होती है। प्रदान संस्था समुदाय के साथ मिलकर ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने और किसानों की क्षमताओं के विकास की दिशा में जमीनी स्तर पर कार्य कर रही है।

ज्ञान खेतों तक पहुंचे, यही है हमारा लक्ष्य: विशेषज्ञ
इस कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ‘प्रदान’ संस्था के अनुरुद्ध कुमार शास्त्री ने कहा, “किसानों को केवल संसाधन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सही तकनीक, वैज्ञानिक जानकारी और निर्णय लेने की क्षमता से सशक्त बनाना भी जरूरी है। आज आयोजित यह कार्यशाला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हमारा प्रयास है कि विश्वविद्यालयों में उपलब्ध वैज्ञानिक ज्ञान किसानों के खेतों तक पहुंचे और उसका सीधा लाभ ग्रामीण परिवारों की आजीविका में दिखाई दे।”
वहीं, नाबार्ड मंडला के डीडीएम देवव्रत पाल ने अपने विचार रखते हुए कहा, “नाबार्ड ग्रामीण विकास की विभिन्न पहलों के माध्यम से किसानों की क्षमता निर्माण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को निरंतर प्रोत्साहित करता है। हमें विश्वास है कि इस कार्यशाला से प्राप्त जानकारी किसानों को अपनी कृषि गतिविधियों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करेगी।” निश्चित ही यह कार्यशाला किसानों को अपने गांव में उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने और कृषि को अधिक टिकाऊ व लाभकारी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।









