हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, घोड़े पर होगा माता का प्रस्थान

शारदीय नवरात्रि 2026

हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, देश में बरसेगी सुख-समृद्धि

  • नौ दिन माँ की भक्ति में डूबेंगे भक्त, घोड़े पर होगा माता का प्रस्थान
  • 11 से 19 अक्टूबर तक मचेगी नवरात्र की धूम

मंडला महावीर न्यूज 29. नवरात्र के नौ दिन मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि को मुख्य नवरात्रि माना जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार यह नवरात्रि शरद ऋतु में अश्विन शुक्ल पक्ष से शुरू होती हैं और पूरे नौ दिनों तक चलती हैं। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो रही है। भक्तों ने माता की प्रतिमा स्थापना की पूरी तैयारी कर ली है।

आदिशक्ति की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि इस वर्ष 11 से 19 अक्टूबर तक श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। सनातन धर्म की मान्यता अनुसार नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के धरती पर आगमन और वापस प्रस्थान करने वाले वाहनों का विशेष धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व होता है। माना जाता है कि नवरात्रि किस दिन शुरू हो रही है, उससे माता रानी के आगमन का वाहन तय होता है और विजयादशमी दशहरा किस दिन पड़ रही है, उससे उनके प्रस्थान का वाहन निर्धारित होता है। वरदान आश्रम के संचालक पं. राम गोपाल शास्त्री नीलू महाराज ने बताया कि इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी और घोड़े पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी।

हाथी पर आगमन, सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का संकेत 

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर रविवार से हो रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार को नवरात्रि शुरू होने के कारण मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा। देवी भागवत पुराण में हाथी पर माता के आगमन को बेहद शुभ और मंगलकारी माना गया है। मान्यता है कि जब माता हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो प्राकृतिक रूप से अच्छी वर्षा होती है, जिससे कृषि और फसलों की पैदावार में भारी बढ़ोतरी होती है। देश में सुख-समृद्धि, खुशहाली और धन-धान्य का विस्तार होता है। इस लिहाज से मां दुर्गा का हाथी पर आगमन देश के लिए एक बेहद शुभ संकेत है।

घोड़े पर प्रस्थान, अशांति और तनाव का इशारा 

नवरात्रि के समापन के बाद इस बार विजयादशमी दशहरा का पर्व मंगलवार को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार को विदाई होने के कारण मां दुर्गा का प्रस्थान घोड़े पर होगा। शास्त्रों में घोड़े को प्रस्थान का वाहन मानना बहुत शुभ नहीं माना जाता। इस वाहन को लेकर मान्यता है कि यह समाज में अशांति, उथल-पुथल और बेचैनी का संकेत देता है। इसके प्रभाव से लोगों के जीवन में मानसिक तनाव, अस्थिरता और देश-दुनिया में राजनीतिक व प्राकृतिक हलचल बढऩे की बात कही जाती है।

दिन अनुसार तय होती है माता की सवारी 

पंडित नीलू महाराज ने बताया कि नवरात्र का आरंभ यदि सोमवार या रविवार के दिन होता है तो मां दुर्गा का वाहन हाथी होता है। नवरात्रि अगर शनिवार या मंगलवार से शुरू होती है तो माता रानी घोड़े में सवार होकर आती हैं। गुरुवार या शुक्रवार से नवरात्रि की शुरुआत होती है तो मां का आगमन डोली और पालकी पर होता है, वहीं बुधवार के दिन नवरात्रि शुरू होती है तो मां दुर्गा नौका में सवार होकर आती है, यानि मां का वाहन नौका होता है। पंडित नीलू महाराज ने बताया कि मां दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना बहुत शुभ होता है। मान्यताओं के अनुसार अगर नवरात्र का समापन रविवार या सोमवार को होता है तो माता भैंसे पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं, जिसे शुभ नहीं माना जाता है। अगर नवरात्र का समापन मंगलवार और शनिवार को होता है तो मां घोड़े पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं। यह वाहन कष्ट का संकेत है। बुधवार और शुक्रवार को नवरात्र का समापन होने पर माता हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं, यह अधिक वर्षा का संकेत देता है। गुरुवार के दिन नवरात्र का समापन होने पर माता मनुष्य पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं जो कि सुख और समृद्धि का संकेत होता है।

नौ दिनों में मां दुर्गा को भक्त लगाएंगे नौ विशेष भोग 

पंडित नीलू महाराज ने बताया कि नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन अलग-अलग विशेष भोग लगाए जाते हैं। नवरात के पहले दिन आरोग्य और खुशहाली के लिए मां शैलपुत्री को घी का भोग लगाया जाता है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को लंबी उम्र और साधना की सिद्धि के लिए शक्कर का भोग लगाया जाता है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दुखों से मुक्ति के लिए दूध या दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है। चौथे दिन मां कूष्मांडा को बुद्धि और रचनात्मकता के लिए मालपुआ का भोग लगाया जाता है। पांचवें दिन मां स्कंदमाता को उत्तम स्वास्थ्य के लिए केला का भोग लगाया जाता है। छटवें दिन मां कात्यायनी को आकर्षण और सौंदर्य के लिए शहद का भोग लगाया जाता है। सातवें दिन मां कालरात्रि को संकटों से मुक्ति के लिए गुड़ का भोग लगाया जाता है। आठवें दिन मां महागौरी को सुख-समृद्धि और संतान सुख के लिए नारियल का भोग लगाया जाता है। नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को पूर्णता और सुख-शांति के लिए हलवा-पूड़ी, खीर और चना आदि का भोग लगाया जाता है। बताया गया कि श्रद्धालु इस वर्ष 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे इस महापर्व की तैयारियों में जुट गए हैं। 11 अक्टूबर को घटस्थापना के शुभ मुहूर्त के साथ ही मां की आराधना का नौ दिवसीय अनुष्ठान शुरू होगा।


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