नवरात्रि और दशहरा पर्व को लेकर मंडला पुलिस मुस्तैद
जिले भर के थानों में शांति समिति की बैठकें संपन्न
- शांतिपूर्ण दुर्गोत्सव के लिए मंडला पुलिस की पुख्ता तैयारी
- पंडालों में सीसीटीवी, वैध बिजली कनेक्शन और सुरक्षा के सख्त निर्देश
मंडला महावीर न्यूज 29. आगामी नवरात्रि और दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए मंडला पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। पुलिस अधीक्षक श्री राजेश रघुवंशी के निर्देशन में जिले के विभिन्न थाना और चौकी क्षेत्रों में शांति समिति तथा दुर्गोत्सव समितियों की महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गई हैं। इन बैठकों में प्रशासन और आम नागरिकों के बीच समन्वय स्थापित कर त्योहारों की चाक-चौबंद व्यवस्थाओं पर रूपरेखा तैयार की गई।
निवास और खटिया में सुरक्षा व्यवस्थाओं पर मंथन
थाना निवास क्षेत्र के अंतर्गत एसडीएम कार्यालय में एसडीएम श्री के.एल. वर्मा की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में तहसीलदार, नगर परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, दुर्गोत्सव समिति के पदाधिकारी और लगभग 60-70 गणमान्य नागरिक शामिल हुए। यहां दुर्गा प्रतिमा स्थापना से लेकर विजयादशमी और प्रतिमा विसर्जन तक की संपूर्ण व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
वहीं, थाना खटिया परिसर में अनुभागीय अधिकारी (पुलिस) नैनपुर के मार्गदर्शन में आयोजित बैठक में राजस्व और विद्युत विभाग के कर्मचारी भी मौजूद रहे। इस दौरान समितियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि पंडालों में स्वयंसेवक तैनात किए जाएं, निर्धारित समय-सीमा में ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर) का उपयोग हो, और आवागमन बाधित न हो इसके लिए बैरिकेडिंग व ब्रेकर की उचित व्यवस्था की जाए।
सीसीटीवी और वैध बिजली कनेक्शन अनिवार्य
जिले के थाना नैनपुर, मवई, मोहगांव और चौकी टाटरी में भी पुलिस अधिकारियों ने शांति समिति एवं दुर्गोत्सव समिति के सदस्यों के साथ बैठकें कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। नैनपुर और टाटरी में विद्युत विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में सख्त हिदायत दी गई है कि सभी पंडालों में अनिवार्य रूप से वैध विद्युत कनेक्शन लिए जाएं। इसके अलावा सुरक्षा के मद्देनजर पंडालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए स्वयंसेवकों की सक्रियता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस और प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी धार्मिक आयोजन पूरी आस्था, उल्लास और कानून-व्यवस्था के दायरे में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों।









