कान्हा में इलाज के दौरान मादा बाघ की मौत

कान्हा टाइगर रिजर्व में इलाज के दौरान मादा बाघ की मौत

एनटीसीए की गाइडलाइन के तहत हुआ अंतिम संस्कार

  • जंगल में बीमार और अकेली मिली थी बाघिन
  • डेढ़ महीने के उपचार के बाद तोड़ा दम
  • मौत का कारण जानने जबलपुर भेजे गए सैंपल

मंडला महावीर न्यूज 29. कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र में स्थित वन्य प्राणी उपचार केंद्र में उपचाराधीन एक मादा बाघ की 6 अक्टूबर को मौत हो गई। बुधवार को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण् की मानक संचालन प्रक्रिया के तहत वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बाघिन का पोस्टमार्टम कर उसका शवदाह कर दिया गया है।

जानकारी अनुसार इस मादा बाघ को विगत माह 26 अगस्त को वन विभाग के गश्ती दल ने जंगल में अकेला और शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हालत में देखा था। उसकी जान बचाने और स्वास्थ्य में सुधार के उद्देश्य से 27 अगस्त से उसे रेस्क्यू कर वन्य प्राणी चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया था। उपचार केंद्र में उसका लगातार इलाज चल रहा था, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद 6 अक्टूबर को उसकी मृत्यु हो गई।

अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ शवदाह 

बुधवार को एनटीसीए की गाइडलाइन का पालन करते हुए कान्हा टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सा अधिकारी और बैहर के पशु चिकित्सक की संयुक्त टीम ने मृत बाघिन का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद निर्धारित नियमों के तहत शवदाह की कार्रवाई पूरी की गई। इस प्रक्रिया के दौरान कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक, उपसंचालक (कोर), सहायक संचालक (हालोन), मुक्की परिक्षेत्र अधिकारी, एनटीसीए के प्रतिनिधि रंजीत सत्रसुलय सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और वन विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

फोरेंसिक जांच के लिए जबलपुर भेजे गए सैंपल 

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान बाघिन के आवश्यक शारीरिक अंगों और जैविक नमूनों को सुरक्षित कर फोरेंसिक एवं पैथोलॉजिकल जांच के लिए जबलपुर स्थित प्रयोगशाला भेज दिया गया है। लैब से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही बाघिन की मौत के सटीक कारणों का आधिकारिक रूप से खुलासा हो सकेगा।


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