मंडला फोर्ट स्टेशन पर करोड़ों खर्च, पर सुरक्षा शून्य
प्लेटफॉर्म पर मवेशियों का आतंक
- आरपीएफ रिपोर्ट ने खोली पोल
- यात्रियों की जान रामभरोसे
- मंडला फोर्ट में आरपीएफ की स्थाई चौकी नहीं
- नैनपुर के औचक निरीक्षण पर टिकी है सुरक्षा
मंडला महावीर न्यूज 29. अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत मध्य प्रदेश के मंडला फोर्ट (Mandla Fort) रेलवे स्टेशन के कायाकल्प, सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। हालांकि, यात्रियों की सुरक्षा के मामले में रेलवे प्रशासन की घोर लापरवाही उजागर हुई है। हाल ही में 4 अक्टूबर 2026 को स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर मवेशियों (भैंसों) के बेखौफ दौड़ने का वीडियो सामने आया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरपीएफ के पत्र में उजागर हुई जमीनी हकीकत
रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी द्वारा किए गए पत्राचार के बाद संलग्न “Mandla Fort.jpg” पत्र के माध्यम से स्टेशन की सुरक्षा की असलियत सामने आई है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर के महानिरीक्षक कार्यालय द्वारा 6 अगस्त 2026 को नितिन सोलंकी को जारी इस पत्र में यह स्वीकार किया गया है कि मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन ‘रेलवे सुरक्षा बल (RPF) पोस्ट नैनपुर’ के क्षेत्राधिकार में आता है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में बल की उपलब्धता के अनुसार, नैनपुर पोस्ट के प्रभारी और बल सदस्यों द्वारा समय-समय पर और आवश्यकतानुसार मंडला फोर्ट स्टेशन पर औचक चेकिंग या ड्राइव की जाती है।
सुरक्षा को लेकर संबंधित पुलिस थाना से समन्वय कर आवश्यक कार्यवाही करने की बात भी पत्र में कही गई है। इससे यह साफ हो गया है कि करोड़ों खर्च होने के बावजूद इतने बड़े स्टेशन पर कोई स्थाई आरपीएफ चौकी या स्थाई बल मौजूद नहीं है।
महिला सुरक्षा और रात्रिकालीन हॉल्ट पर था पत्राचार
आरपीएफ बिलासपुर द्वारा भेजा गया यह आधिकारिक जवाब एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी की उस शिकायत के संदर्भ में दिया गया है, जिसमें उन्होंने मंडला फोर्ट पर रात में 5 घंटे तक खड़ी रहने वाली ट्रेनों के दौरान यात्री सुरक्षा (विशेषकर महिला सुरक्षा) और आरपीएफ आउटपोस्ट की स्थापना का अहम मुद्दा उठाया था। लेकिन सुरक्षा व्यवस्था महज औचक निरीक्षण और कागजों के भरोसे चल रही है।
हादसे को सीधा न्योता और जनता के सवाल
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि प्लेटफॉर्म पर जिस समय बच्चे और यात्री मौजूद थे, तभी 3-4 भारी-भरकम मवेशी तेज रफ्तार में दौड़ पड़े। यदि ये मवेशी किसी बच्चे, महिला या बुजुर्ग से टकरा जाते, तो बड़ी भगदड़ या जानलेवा हादसा हो सकता था।
क्षेत्रीय जनता और रेल यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से तीखा सवाल किया है कि जब स्टेशन की साज-सज्जा और नई इमारतों पर करोड़ों रुपये बहाए जा सकते हैं, तो स्थाई आरपीएफ चौकी और दो जवानों की तैनाती के लिए संसाधनों और बजट की कमी क्यों बताई जाती है? रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी और स्थानीय निवासियों ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) व रेल मंत्रालय से पुरजोर मांग की है कि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए मंडला फोर्ट स्टेशन पर तत्काल आरपीएफ आउटपोस्ट की स्थापना की जाए।










