संघर्ष से सफलता, एक मजदूर मां की बेटी ने रचा इतिहास

संघर्ष से सफलता, एक मजदूर मां की बेटी ने रचा इतिहास

खेतों में मजदूरी और मनरेगा में काम कर पढ़ाई का खर्च जुटाया

  • बिना कोचिंग सुषमा मरावी ने उत्तीर्ण की एमपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा
  • पिता के निधन के बाद टूटा दुखों का पहाड़, नहीं हारी हिम्मत

मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के बिछिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम सुकतरा-कन्हारी की बेटी सुषमा मरावी ने बिना किसी बड़ी कोचिंग के एमपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा उत्तीर्ण कर जिले का मान बढ़ाया है। एक निरक्षर मजदूर मां की बेटी की यह उपलब्धि आज पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

सुषमा का जन्म एक साधारण आदिवासी परिवार में हुआ। उनके पिता स्व. पंचू मरावी पेशे से ड्राइवर थे और मां नन्हीं मरावी मजदूरी करती हैं। वर्ष 2010 में पिता के आकस्मिक निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया, लेकिन सुषमा ने हिम्मत नहीं हारी। अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया, खेतों व मनरेगा में मजदूरी की और ब्यूटी पार्लर में भी काम किया। सुषमा की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती ज्ञान मंदिर बिछिया एवं शासकीय विद्यालय माधोपुर से हुई। इसके बाद उन्होंने उत्कृष्ट विद्यालय मंडला से जीवविज्ञान विषय में 12वीं और वर्ष 2016 में रानी दुर्गावती महाविद्यालय से बीए की डिग्री हासिल की।

डायल 100 में नाइट ड्यूटी करते हुए की आगे की पढ़ाई 

स्नातक के बाद भी सुषमा का संघर्ष जारी रहा। वर्ष 2017-18 में पुलिस कांस्टेबल भर्ती में चयन होने के बावजूद वे मेडिकल परीक्षण में बाहर हो गईं। इसके बाद उन्होंने भोपाल में डायल-100 और 108 एंबुलेंस सेवा में कॉल टेकर के रूप में नाइट ड्यूटी की। इसी दौरान नौकरी के साथ उन्होंने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र विषय में एमए पूर्ण किया और असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा की तैयारी में जुटी रहीं।

मां और स्वर्गीय मामा को समर्पित की सफलता 

सुषमा के जीवन को संवारने में उनके मामा स्व. गुलाब सिंह उइके की अहम भूमिका रही। वर्ष 2024 में परीक्षा से ठीक एक दिन पहले मामा का निधन हो गया था। उनकी अंतिम इच्छा थी कि भांजी सुषमा कुछ बड़ा हासिल करे और उसका नाम अखबार में आए, ताकि गांव के लोग प्रेरित होकर अपनी बेटियों को पढ़ाएं। अपनी इस उपलब्धि पर सुषमा ने भावुक होते हुए कहा कि मेरी मां निरक्षर हैं और मजदूरी करती हैं। मैंने कोई बड़ी कोचिंग नहीं ली, यह सफलता मेरी नहीं बल्कि मेरी मां के त्याग और मामा के आशीर्वाद का परिणाम है।


Leave a Comment