मानिकपुर के जंगल में जुटे डेढ़ सौ से ज्यादा प्रकृति के सफाईकर्मी

मानिकपुर के जंगल में जुटे डेढ़ सौ से ज्यादा प्रकृति के सफाईकर्मी

सरकारी गणना में मिले थे मात्र 9 गिद्ध

  • वन विभाग की उदासीनता से ग्रामीणों में रोष
  • मानिकपुर में दिखा 150 से अधिक संकटग्रस्त गिद्धों का विशाल झुंड
  • संरक्षण की उठी मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले के निवास विकासखंड अंतर्गत ग्राम मानिकपुर से प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक अत्यंत सुखद व उत्साहजनक खबर सामने आई है। यहां जंगल से सटे एक खुले मैदान में संकटग्रस्त और विलुप्तप्राय श्रेणी में शामिल गिद्धों का एक विशाल झुंड एक साथ बैठा हुआ दिखाई दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस झुंड में 150 से अधिक गिद्ध शामिल थे। कई वर्षों बाद एक साथ इतनी बड़ी संख्या में गिद्धों का जमावड़ा देखकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी कौतूहल और खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने इस दुर्लभ नजारे का वीडियो भी बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी अनुसार यह घटना पर्यावरणविदों के लिए विशेष मायने रखती है, क्योंकि मानिकपुर और हाथीतारा के आसपास हर साल गिद्ध नजर आते हैं, लेकिन विभागीय आंकड़ों में इनकी उपस्थिति नगण्य रहती है। उत्साह से भरे स्थानीय लोगों ने जब निवास वन परिक्षेत्र अधिकारी और उनके अमले को इतनी बड़ी संख्या में गिद्धों के दिखने की सूचना दी, तो विभाग द्वारा इसमें कोई खास रुचि नहीं दिखाई गई। वन अमले के इस उदासीन रवैये से ग्रामीणों में गहरी निराशा है। लोगों का कहना है कि एक ओर विभाग स्वयं गिद्धों के विलुप्त होने की आशंका जताता है, वहीं दूसरी ओर जब मानिकपुर में इनका विशाल झुंड नजर आ रहा है, तो उन्हें फिर से बसाने और संरक्षित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।

हर वर्ष दो चरणों में होती है गिद्ध गणना 

प्रदेश सरकार द्वारा गिद्धों के संरक्षण के उद्देश्य से हर वर्ष दो चरणों में तीन दिवसीय गिद्ध गणना कराई जाती है। बीते 22 से 24 मई 2026 के बीच हुई ग्रीष्मकालीन गणना के आंकड़े मानिकपुर की वर्तमान तस्वीर से बिल्कुल उलट थे। इस गणना में पूरे पश्चिम सामान्य वनमंडल के निवास परिक्षेत्र की कोहानी बीट में सफेद पीठ वाले 9 गिद्ध जिसमें 7 वयस्क और 2 अवयस्क दर्ज किए गए थे। वहीं पूर्व सामान्य वनमंडल में 31 गिद्ध जिसमें 30 वयस्क, 1 अवयस्क और कान्हा टाइगर रिजर्व में सर्वाधिक 333 गिद्ध 305 वयस्क, 28 अवयस्क मिले थे, जिनमें भारतीय गिद्ध और सफेद पीठ वाले गिद्ध शामिल हैं। सरकारी गणना में महज 9 गिद्ध मिलने वाले क्षेत्र में एक साथ 150 से अधिक गिद्धों का दिखना विभागीय गणना की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।

क्यों जरूरी है प्रकृति के सफाईकर्मियों का संरक्षण 

गिद्धों को पर्यावरण का प्राकृतिक सफाईकर्मी माना जाता है। इनकी पाचन शक्ति अत्यंत मजबूत होती है और ये मृत पशुओं के शवों को खाकर गंभीर बीमारियों के संक्रमण को फैलने से रोकते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र को स्वच्छ रखते हैं। पिछले कुछ दशकों में बीमार मवेशियों को दी जाने वाली दर्द निवारक दवा डाइक्लोफेनेक के कारण गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट आई है। ऐसे मृत मवेशियों का मांस खाने से गिद्धों के शरीर में घातक रिएक्शन होता है, जिससे उनकी मौत हो जाती है।

संरक्षण के लिए की जाए विशेष कार्ययोजना 

मानिकपुर में डेढ़ सौ से अधिक गिद्धों का एक साथ दिखना इस बात का सकारात्मक संकेत है कि यहां उनके लिए उपयुक्त पर्यावास और भोजन उपलब्ध है। पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व वन विभाग से मांग की है कि इस क्षेत्र में गिद्धों के संरक्षण के लिए तत्काल विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे ये दुर्लभ पक्षी इस इलाके से पलायन न करें और इनकी संख्या में निरंतर इजाफा हो सके।


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