RTI में बड़ा खुलासा: नागपुर-मंडला फोर्ट ट्रेन को स्थायी करने का कोई प्रस्ताव ही नहीं
सांसद की चुप्पी से यात्रियों में भारी आक्रोश
- चुनाव में वादे, अब खामोशी!
- नागपुर-मंडला ट्रेन के नियमितीकरण पर रेलवे के पास कोई योजना नहीं
- महंगी बसों में सफर करने को मजबूर जनता
नागपुर-मंडला फोर्ट ट्रेन को स्थायी करने की कोई योजना नहीं, आरटीआई से हुआ चौंकाने वाला खुलासा बिलासपुर रेलवे जोन ने रेलवे बोर्ड को नहीं भेजा कोई प्रस्ताव; 35 वर्षों के संसदीय कार्यकाल के बावजूद सीधी रेल सेवा न मिलने से यात्रियों में आक्रोश
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला लोकसभा क्षेत्र के रेल यात्रियों के साथ एक बार फिर बड़ा छलावा सामने आया है। एक तरफ जहां क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और स्थानीय सांसद विकास व नई रेल सुविधाओं के लंबे-चौड़े दावे करते हैं, वहीं दूसरी तरफ नागपुर-मंडला फोर्ट (08841/08842) जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन को स्थायी (नियमित) करने को लेकर रेलवे प्रशासन के पास कोई योजना ही नहीं है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) बिलासपुर द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत दी गई जानकारी ने रेल प्रशासन की उदासीनता के साथ-साथ स्थानीय सांसद की कार्यशैली और चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूचना के अधिकार (RTI) से खुली पोल
एक कार्यकर्ता द्वारा लगाई गई आरटीआई के जवाब में बिलासपुर जोन के प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक कार्यालय ने यह चौंकाने वाली स्थिति स्पष्ट की है। सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत जारी जवाब (पत्र क्र. C/SECR/BSP/RTI/00361/1/26-27/808) में जनसूचना अधिकारी (CPIO) एवं उप मुख्य वाणिज्य प्रबंधक कौशिक मित्रा ने खुलासा किया है कि:
- कोई प्रस्ताव तैयार नहीं: SECR मुख्यालय के वाणिज्य विभाग की ओर से नागपुर-मंडला फोर्ट ट्रेन को स्थायी रूप से चलाने के लिए कोई प्रस्ताव, नोट, व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) या औचित्य तैयार ही नहीं किया गया है।
- रेलवे बोर्ड को नहीं भेजा गया पत्र: इस ट्रेन के नियमितीकरण या विस्तार को लेकर बिलासपुर मुख्यालय द्वारा रेलवे बोर्ड को कोई पत्राचार या अनुशंसा नहीं भेजी गई है।
35 सालों का संसदीय कार्यकाल और बस लॉबी से साठगांठ की आशंका
आरटीआई से यह सच सामने आने के बाद क्षेत्रीय यात्रियों और आम नागरिकों में गहरा रोष व्याप्त है। लोगों का सवाल है कि चुनाव के समय रेल सुविधाओं का वादा करने वाले मंडला सांसद आखिर इस जनहित के मुद्दे पर क्यों मौन हैं?
- महंगी बसों में सफर की मजबूरी: नागपुर से मंडला के बीच इलाज, शिक्षा और व्यापार के लिए रोजाना सैकड़ों लोग आवागमन करते हैं। सीधी और स्थायी ट्रेन सुविधा न होने के कारण आदिवासी बाहुल्य जिले के गरीब व मध्यमवर्गीय यात्रियों को महंगे किराए वाली निजी बसों में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
- इच्छाशक्ति पर सवाल: यात्रियों का कहना है कि पिछले लगभग 35 वर्षों से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद आज तक नागपुर-मंडला सीधी स्थायी ट्रेन सेवा चालू न करा पाना जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
- निजी बस संचालकों को लाभ पहुंचाने की चर्चा: जब रेलवे मुख्यालय स्तर से ही ट्रेन को स्थायी करने का प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ाया गया, तो जनता के बीच अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कहीं निजी बस संचालकों को फायदा पहुंचाने के लिए तो इस रेल सेवा को अटकाया नहीं जा रहा है?
सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मंडला और महाकौशल क्षेत्र की जनता को हर बार केवल ‘स्पेशल ट्रेन’ का झुनझुना पकड़ाकर बहला दिया जाता है, जबकि इस ट्रेन का नियमितीकरण क्षेत्र की सबसे बड़ी जरूरत है। क्षेत्रीय यात्रियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय सांसद और रेलवे प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप कर SECR मुख्यालय से स्थायी प्रस्ताव तैयार करवाकर रेलवे बोर्ड को नहीं भिजवाया, तो क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।











