मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में मंडला की अनदेखी
27 रूटों में आदिवासी अंचल को नहीं मिली एक भी बस
- बड़े दावों की खुली पोल
- सैकड़ों बसों के आवंटन में मंडला की झोली खाली
- सुगम परिवहन से महरूम हुआ आदिवासी अंचल
मंडला महावीर न्यूज 29. मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के तहत जारी बसों की रूट सूची ने आदिवासी बाहुल्य जिले मंडला के लोगों को गहरी निराशा में डाल दिया है। इंदौर क्षेत्र से जारी हुई इस बस सेवा प्रणाली में मंडला जिले को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है, जो इस अंचल के प्रति प्रशासनिक उपेक्षा का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
सरकारी कागजों पर चमकी सेवा, मंडला रहा खाली
प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत 89 इंटरसिटी और 427 इंट्रासिटी/सब-अर्बन बसों का बड़ा जाल बिछाया जा रहा है। इंदौर से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए कुल 27 प्रमुख अंतरसिटी मार्गों का खाका तैयार किया गया है। इस सूची में सिवनी, अनूपपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, रीवा और सागर जैसे तमाम जिलों को जगह मिली है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस लंबी-चौड़ी सूची में आदिवासी बाहुल्य जिले मंडला का नाम दर्ज करना तक जरूरी नहीं समझा गया।
सम्मान के दावों पर कड़वा सवाल
इस प्रशासनिक अनदेखी ने सरकार के उन बड़े दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें चुनावी मंचों से आदिवासी अंचलों के विकास और सम्मान की बात की जाती है। एक तरफ जहाँ 89 बसों का बेड़ा अलग-अलग जिलों के लिए दौड़ने को तैयार है, वहीं मंडला को इस योजना से ‘शून्य’ हासिल हुआ है।
रोजगार, बेहतर शिक्षा और इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करने वाली मंडला की जनता अब यह पूछने पर मजबूर है कि आखिर उन्हें कब तक हाशिए पर रखा जाएगा? क्या मंडला के नागरिकों को सुगम और सस्ती परिवहन व्यवस्था का अधिकार नहीं है? स्थानीय लोगों में भारी रोष है और उनकी मांग है कि ‘सुगम परिवहन सेवा’ का दायरा केवल गिने-चुने शहरों तक सीमित न रखकर आदिवासी अंचलों को भी उनका वाजिब हक दिया जाए।









