मंडला SDM के खिलाफ सड़क पर उतरे पटवारी
दुर्व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना का लगाया आरोप
- निलंबन और दबाव से भड़के मंडला के पटवारी
- 21 से सामूहिक अवकाश और ‘कलम बंद’ हड़ताल की चेतावनी
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले में राजस्व विभाग के अंतर्गत काम करने वाले पटवारियों और मंडला एसडीएम (SDM) शैलेन्द्र चौधरी के बीच विवाद गहरा गया है। शुक्रवार को जिले के पटवारी एसडीएम के विरोध में सड़कों पर उतर आए। नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे पटवारियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और एसडीएम पर दुर्व्यवहार, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
मप्र पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष गीतेन्द्र ‘गीतू’ बैरागी के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में प्रशासन से संबंधित कार्यवाहियों पर पुनर्विचार करने और पटवारियों की समस्याओं के तत्काल निराकरण की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला और प्रमुख आरोप?
पटवारी संघ का कहना है कि प्रांतीय आह्वान के तहत प्रदेश भर के पटवारी ‘स्वामित्व योजना’ से संबंधित कार्यों से खुद को अलग कर चुके हैं। इसकी लिखित सूचना जिला और तहसील स्तर पर पहले ही दी जा चुकी थी। इसके बावजूद एसडीएम मंडला द्वारा पटवारियों पर कार्य करने का अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। ज्ञापन में दो प्रमुख घटनाओं का जिक्र किया गया है:
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पटवारी का मोबाइल छीनने का आरोप: 17 सितंबर को ग्राम पंचायत जंतीपुर में एसडीएम द्वारा पटवारी दिनेश तिवारी पर कार्य के लिए दबाव बनाया गया। आरोप है कि एसडीएम ने उनका मोबाइल छीनकर आईडी और पासवर्ड ले लिया। संघ के अनुसार, दिनेश तिवारी हृदय रोग और ब्लड प्रेशर के मरीज हैं और इस घटना के बाद से वे मानसिक रूप से बेहद डरे हुए और परेशान हैं।
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बिना नोटिस दिए निलंबन: ग्राम आमानाला के पटवारी शशिकांत चौबे को फार्मर आईडी और स्वामित्व योजना के कार्य में लापरवाही का हवाला देकर निलंबित कर दिया गया। संघ का तर्क है कि चौबे की फार्मर आईडी प्रगति 41.87% थी, जो जिले के कई अन्य पटवारियों से बेहतर है। इसके अलावा, सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके चौबे को बिना कारण बताओ नोटिस (Show-cause notice) दिए सीधे निलंबित कर दिया गया, जिसे संघ ने अनुचित बताया है।
पटवारी संघ की चेतावनी: 21 से सामूहिक अवकाश
पटवारी संघ ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए कार्यवाही निरस्त नहीं की गई, तो मंडला तहसील के सभी पटवारी शासकीय कार्यों का बहिष्कार करेंगे।
विरोध के पहले चरण में पटवारियों ने 21 सितंबर से 23 सितंबर तक तीन दिनों के सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया है। संघ का कहना है कि अगर इसके बाद भी उनकी मांगों का निराकरण नहीं होता है, तो वे अनिश्चितकालीन ‘कलम बंद हड़ताल’ करने के लिए बाध्य होंगे।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है और देखना होगा कि कलेक्टर इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।











