राधाष्टमी में वरदान आश्रम में लगेगा 56 भोग

आज मनाई जाएगी राधाष्टमी, वरदान आश्रम में लगेगा 56 भोग

श्रीकृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री हैं श्री राधा जी

मंडला महावीर न्यूज 29.  भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद मनाया जाने वाला श्री राधा रानी का जन्मोत्सव राधाष्टमी इस वर्ष उदयातिथि के अनुसार 19 सितंबर को पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। अंजनिया स्थित वरदान आश्रम में इस पावन पर्व को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं, जहां परंपरानुसार वैदिक विधि-विधान से श्रीजी का जन्मोत्सव मनेगा।

वरदान आश्रम के संचालक भागवत रसिक पं. राम गोपाल शास्त्री नीलू महाराज ने बताया कि पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 12.06 बजे से प्रारंभ हो रही है, जो 19 सितंबर को दोपहर 2.09 बजे तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार राधाष्टमी का मुख्य पर्व 19 सितंबर को ही मनाया जाएगा।

राधा-कृष्ण के बिना अधूरी है पूजा 

नीलू महाराज ने राधाष्टमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन परंपरा में श्री राधा को भगवान श्रीकृष्ण की शक्ति माना गया है। उनके बगैर न सिर्फ श्रीकृष्ण अधूरे हैं, बल्कि भक्तों की पूजा भी पूर्ण नहीं मानी जाती। शास्त्रों में मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा जी की आराधना करने से भक्तों को सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन के सभी कष्टों का निवारण हो जाता है। उन्होंने बताया कि राधा जी श्रीकृष्ण की प्रियतमा हैं और वे उनके वक्ष:स्थल में वास करती हैं। श्री राधा श्रीकृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी कृष्णवल्लभा हैं, जो उन्हें आनंद प्रदान करती हैं। श्री राधा और श्रीकृष्ण परस्पर आराध्य और आराधक हैं, अर्थात दोनों ही एक-दूसरे के इष्ट देवता हैं।

आश्रम में होगा षोडशोपचार पूजन और लगेगा 56 भोग 

राधाष्टमी के अवसर पर वरदान आश्रम में होने वाले आयोजनों की रूपरेखा बताते हुए नीलू महाराज ने कहा कि इस वर्ष भी पर्व को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। पर्व के दिन प्रात: काल श्रीजी राधा रानी के विग्रह का भव्य अभिषेक किया जाएगा। इसके पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के बीच षोडशोपचार विधि से श्रीजी का पूजन संपन्न होगा। श्री राधा रानी को 56 भोग अर्पित किए जाएंगे, जिसके बाद उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसादी का वितरण किया जाएगा।


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