11 करोड़ की लागत से बन रहे धनगांव ITI भवन निर्माण में अनियमितताएं

11 करोड़ की लागत से बन रहे धनगांव आईटीआई भवन निर्माण में अनियमितताएं

घटिया सामग्री और मजदूरों के शोषण का लगाया आरोप

  • ढाई साल से कछुआ चाल से चल रहा काम, छत से टपक रहा पानी
  • कांग्रेस ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग

मंडला महावीर न्यूज 29. वनांचल विकासखंड मवई के ग्राम धनगांव में पीआईयू विभाग के अंतर्गत लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन आईटीआई भवन इन दिनों अपनी गुणवत्ता और कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी शिक्षा और रोजगार से जोडऩे के उद्देश्य से स्वीकृत यह प्रोजेक्ट पिछले ढाई वर्षों से कछुआ गति से चल रहा है। हाल ही में मजदूरों की शिकायत मिलने पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मवई के अध्यक्ष संतोष रानू हरदहा ने निर्माण स्थल का जायजा लिया, जिसके बाद विभागीय निगरानी और ठेकेदार की कार्यप्रणाली की कई खामियां उजागर हुई हैं।मौके पर कार्यरत मजदूरों ने बताया कि उन्हें उनकी मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं किया जाता। साप्ताहिक मजदूरी अक्सर हाट-बाजार का दिन निकल जाने के बाद शाम को दी जाती है, जिससे वनांचल से आने वाले मजदूरों को घरेलू जरूरतें पूरी करने में भारी परेशानी होती है। इसके साथ ही मजदूरों को काम के दौरान आवश्यक सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उनके सुरक्षा बीमा को लेकर भी कोई जानकारी नहीं दी गई है, जिससे दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।

मिट्टी युक्त रेत का इस्तेमाल और लेंटर में आ रही सीपेज 

निर्माण स्थल पर इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता पर भी स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि काम में मिट्टी मिश्रित रेत और संदिग्ध गुणवत्ता वाले सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है। बताया गया कि सबसे गंभीर लापरवाही भवन के लेंटर निर्माण में सामने आई है। लेंटर में पानी भरने और सीपेज होने की शिकायत के बावजूद ठेकेदार द्वारा उसके ऊपर टॉपिंग का काम किया जा रहा है। ऐसे में करोड़ों की लागत वाले इस भवन की भविष्य की मजबूती खतरे में नजर आ रही है।

विभागीय इंजीनियरों की भूमिका पर उठे सवाल 

इस स्तर की अनियमितताओं ने विभागीय इंजीनियरों की मॉनिटरिंग पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष संतोष रानू हरदहा ने कहा कि यह केवल एक सरकारी इमारत नहीं है, बल्कि वनांचल के युवाओं के भविष्य से जुड़ा संस्थान है, जिसके साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माण स्थल से रेत, सीमेंट एवं अन्य सामग्री के नमूने लेकर स्वतंत्र प्रयोगशाला से तकनीकी जांच कराई जाए। मजदूरों के लंबित भुगतान और सुरक्षा व्यवस्था की तुरंत समीक्षा हो। जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।


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