विदेशी मेहमान एशियन ओपनबिल की मंडला से विदाई

विदेशी मेहमान एशियन ओपनबिल की मंडला से विदाई

मंडला के खुकसर गांव में आंधी-तूफान भी नहीं डिगा पाते घोंसले

  • मौसम विज्ञानियों से भी सटीक है इनकी भविष्यवाणी
  • किसानों के मित्र उड़ला पक्षी अब कर रहे अपने नए सफर की तैयारी

मंडला महावीर न्यूज 29. कुदरत के कुछ रहस्य आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं। मंडला जिले के खुकसर गांव में हर साल जून के महीने में विदेशी मेहमानों की तरह पहुंचने वाले एशियन ओपनबिल पक्षी अब अक्टूबर माह में विदाई की तैयारी कर रहे हैं। इन पक्षियों के आने के साथ बारिश की शुरुआत और अक्टूबर में वापसी का यह मौसमी सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है। इनकी सबसे खास बात यह है कि पेड़ों की ऊंची डालियों पर बनाए गए इनके घोंसले इतने मजबूत होते हैं कि तेज आंधी और तूफान के बीच भी टिके रहते हैं। जानकारी अनुसार हर साल जून में ये पक्षी अपने लिए सुरक्षित ठिकाना चुनते हैं। मंडला के नदी, जलस्रोत, पर्याप्त भोजन और हरियाली इन्हें अपनी ओर आकर्षित करते हैं। ग्रामीण इन पक्षियों के आगमन को खुशहाली और बारिश से जोड़कर देखते हैं। मान्यता है कि इनके पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद झमाझम बारिश शुरू हो जाती है।

मौसम विज्ञानियों से भी सटीक है टाइमिंग

वर्ष 2006 से इन पक्षियों पर निरंतर अध्ययन कर रहे पक्षी विशेषज्ञ राजीव मिश्रा बताते हैं कि स्थानीय भाषा में इन्हें उड़ला कहा जाता है। राजीव मिश्रा ने बताया कि ये पक्षी मौसम विज्ञानियों से भी अधिक सटीक भविष्यवाणी करते हैं। ये तेज बारिश शुरू होने से दो-चार दिन पहले ही आकर अपने घोंसले तैयार कर लेते हैं। हजारों किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर यहां आने वाले इन पक्षियों के पास कई पीढिय़ों का अनुभव, एक पूरा रूट मैप और सटीक टाइमिंग होती है।

किसानों के मित्र है ये पक्षी और वनस्पतियों के ज्ञाता

अध्ययन में यह भी सामने आया है कि ये पक्षी किसानों के मित्र होते हैं, क्योंकि ये खेतों में जाकर फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों का भक्षण करते हैं। राजीव मिश्रा ने बताया कि जब अत्यधिक बारिश से बाढ़ के हालात बनते हैं, तो ये पक्षी कुछ विशेष वनस्पतियों की पत्तियों को लाकर अपने बच्चों को खिलाते हैं, जो इनके गहरे औषधीय ज्ञान को दर्शाता है। अब अक्टूबर का महीना है और मौसम में बदलाव हो रहा है। इन प्रवासी पक्षियों के बच्चों का उड़ान भरने और भोजन तलाशने का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है, जिसके बाद अब ये पक्षी अपने अगले प्रवास पर निकलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। जिन पेड़ों पर महीनों तक इनकी चहचहाहट गूंजती रही, वे जल्द ही सूने नजर आएंगे, लेकिन प्रकृति के संरक्षण का एक अहम संदेश ये विदेशी मेहमान एशियन ओपनबिल दे रहे है।


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