मृत्यु भोज छोड़ दिवंगत शिक्षक के पुत्रों ने 5 बेटियों की पढ़ाई के लिए दिए 55 हजार रुपये
- समाज को नई दिशा देती ठाकुर परिवार की पहल
- पिता की स्मृति में कन्याओं के शिक्षा के लिए दी 11-11 हजार रूपए
मंडला महावीर न्यूज 29. समाज में वर्षां से चली आ रही मृत्यु भोज की खर्चीली परंपरा को त्यागकर बम्हनी बंजर के एक परिवार ने समाज सुधार और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में अनुकरणीय पहल की है। सेवानिवृत्त शिक्षक स्वर्गीय संग्राम सिंह ठाकुर के पुत्रों ने अपने पिता की पुण्यस्मृति में मृत्यु भोज के आयोजन से दूरी बनाते हुए उस राशि को जरूरतमंद बेटियों की शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने क्षेत्र की पांच कन्याओं को पढ़ाई में सहयोग के लिए कुल 55 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की, जिसकी पूरे अंचल में भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है। परिवार के इस कदम को बालिका शिक्षा के संवर्धन और सामाजिक सुधार की एक अनुपम मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
जानकारी अनुसार स्वर्गीय संग्राम सिंह ठाकुर का जन्म 7 सितंबर 1943 को हुआ और निधन 26 सितंबर 2026 को हुआ था। पिता के अवसान के बाद उनके पुत्र ओमप्रकाश ठाकुर एवं जयप्रकाश ठाकुर ने अपने पिता के आदर्शों और इच्छा का सम्मान करते हुए पारंपरिक मृत्यु भोज न कराने का निर्णय लिया। परिवार का मानना है कि किसी प्रियजन के चले जाने के बाद उनकी स्मृति में फिजूलखर्ची करने के बजाय यदि समाजोपयोगी और जनकल्याणकारी कार्य किए जाएं, तो वही दिवंगत आत्मा को सच्ची श्रद्धांजलि होती है।
5 बेटियों की पढ़ाई को मिला संबल
परिवार द्वारा इस प्रेरक पहल के अंतर्गत क्षेत्र की पांच प्रतिभावान एवं जरूरतमंद बालिका संध्या यादव, पलक ठाकुर, महक ठाकुर, माही झारिया एवं शावनी ठाकुर का चयन किया गया। इन सभी पांचों कन्याओं को पढ़ाई जारी रखने के लिए 11-11 हजार रुपये कुल 55 हजार रुपये की सहायता राशि सौंपी गई। यह आर्थिक सहयोग इन बेटियों के शैक्षणिक भविष्य को संवारने में मील का पत्थर साबित होगा।
कुरीतियों को दर किनार कर दिया जागरूकता का संदेश
आमतौर पर किसी व्यक्ति के निधन के बाद मृत्यु भोज के आयोजन से शोकाकुल परिवार पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है, जिससे कई बार गरीब परिवार कर्ज के दलदल में फंस जाते हैं। ऐसे में ठाकुर परिवार का यह कदम समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि फिजूलखर्ची छोड़कर कैसे शिक्षा और समाज सेवा को बढ़ावा दिया जा सकता है।
ग्रामीणों और समाजसेवियों ने की मुक्तकंठ से सराहना
स्वर्गीय संग्राम सिंह ठाकुर के बेटों द्वारा उठाए गए इस प्रगतिशील कदम की नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के समाजसेवियों व गणमान्य नागरिकों ने जोरदार सराहना की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहल न केवल बालिका शिक्षा को बढ़ावा देती है, बल्कि समाज में व्याप्त फिजूलखर्ची जैसी प्रथाओं के खिलाफ एक सशक्त संदेश भी प्रस्तुत करती है। क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई है कि इस प्रेरणादायक कदम से सीख लेकर अन्य लोग भी समाजहित और बालिका शिक्षा के संवर्धन के लिए आगे आएंगे।










