वेतन भुगतान में देरी से वनांचल के शिक्षकों में भारी आक्रोश
- मवई में शिक्षकों पर दोहरी मार, वेतन अटका तो बैंकों ने कसनी शुरू की ईएमआई
- बीईओ की अनुपस्थिति से बिगड़ा विभागीय ढर्रा, कलेक्ट्रेट तक गुहार
मंडला महावीर न्यूज 29. मवई विकासखंड की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था के घेरे में आ खड़ी हुई है। शिक्षकों की निरंतर कमी और विद्यालयों में बढ़ती व्यवस्थागत परेशानियों के बीच अब शिक्षकों को समय पर वेतन न मिलने का बड़ा मामला सामने आया है। विकासखंड मवई में पदस्थ दर्जनों शिक्षकों को पिछले माह का वेतन अब तक प्राप्त नहीं हुआ है, जिससे शिक्षकों में भारी नाराजगी व्याप्त है। एक तरफ शिक्षक वनांचल क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों में समय पर अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी अधिकार यानी अपने वेतन के लिए उन्हें विभागीय कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
स्थानीय शिक्षकों का आरोप है कि मवई विकासखंड में लंबे समय से पूर्णकालिक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की स्थायी पदस्थापना नहीं की गई है। वर्तमान में किसी अन्य विकासखंड के अधिकारी को मवई का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। प्रभार के कारण बीईओ नियमित रूप से मवई कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते हैं और केवल अत्यंत आवश्यक कार्यों के समय ही उनका मवई आना-जाना होता है। विभागाध्यक्ष की अनुपस्थिति के चलते कार्यालयीन मॉनिटरिंग और नियमित नियंत्रण पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।
बाबुओं के भरोसे चल रहा कार्यालय
शिक्षकों ने बताया कि बीईओ की लगातार अनुपस्थिति के कारण ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का पूरा कामकाज वहां पदस्थ बाबुओं और कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। शासकीय फाइलों और वेतन से संबंधित महत्वपूर्ण फाइलों के समय पर निराकरण न होने से शिक्षकों में बेहद असंतोष है। शिक्षकों का सवाल है कि जब विकासखंड स्तर का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ही कार्यालय से गायब रहेगा, तो अधीनस्थ कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण कैसे संभव होगा? इसी ढुलमुल रवैये के कारण वेतन देयकों की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पा रही है।
वेतन अटका, लोन की किस्त और ब्याज का बढ़ा तनाव
वेतन में हो रही देरी का सबसे दर्दनाक असर शिक्षकों के आर्थिक जीवन पर पड़ा है। मवई विकासखंड में कार्यरत कई शिक्षकों ने मकान निर्माण, बच्चों की उच्च शिक्षा, इलाज और अन्य पारिवारिक आवश्यकताओं के लिए बैंकों से लोन ले रखा है। हर महीने वेतन आते ही बैंक की ईएमआई स्वत: कट जाती है या उन्हें खुद जमा करनी होती है। इसके अलावा कई शिक्षकों पर निजी लेन-देन की देनदारियां भी हैं। समय पर वेतन न मिलने से अब बैंक ईएमआई बाउंस होने और उस पर अतिरिक्त जुर्माना व ब्याज लगने का खतरा मंडराने लगा है। घरेलू बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है और शिक्षक वित्तीय मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।
अतिथि शिक्षकों के बाद अब नियमित शिक्षकों में भी आक्रोश
वेतन और मानदेय में देरी की यह बीमारी केवल नियमित शिक्षकों तक सीमित नहीं है। मवई क्षेत्र में पदस्थ अतिथि शिक्षकों को भी बीते कई महीनों से समय पर मानदेय का भुगतान नहीं किया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले माह ही लंबित मानदेय की मांग को लेकर अतिथि शिक्षकों ने बीईओ कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया था। इसके बावजूद विभागीय कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आया और अब नियमित शिक्षकों का वेतन भी अटक गया है, जो संपूर्ण विभागीय व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
स्थायी अधिकारी की मांग
शिक्षकों का कहना है कि मवई जैसे सुदूर आदिवासी वनांचल क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को सुचारु रखना पहले से ही एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में शिक्षकों को वित्तीय मानसिक प्रताडऩा देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। पीड़ित शिक्षकों ने जिला प्रशासन एवं कलेक्टर से मांग की है कि लंबित वेतन का तत्काल भुगतान कराया जाए। वेतन प्रक्रिया में देरी करने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों की जांच कर कार्रवाई की जाए। मवई विकासखंड में प्रभार की व्यवस्था समाप्त कर स्थायी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की पदस्थापना की जाए।










