फुलेहरा की छांव में घर-घर विराजीं माता महालक्ष्मी

फुलेहरा की छांव में घर-घर विराजीं माता महालक्ष्मी

महिलाओं ने रतजगा कर मांगी पति व पुत्र की दीर्घायु

  • श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया महालक्ष्मी पर्व
  • गज पर सवार देवी की हुई आराधना
  • भजन-कीर्तन से धर्ममय हुआ माहौल

मंडला महावीर न्यूज 29. आश्विन कृष्ण अष्टमी के अवसर पर जिलेभर में महालक्ष्मी पर्व पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। व्रती महिलाओं ने घर-घर में आकर्षक फुलेहरा बांधकर उसके नीचे मिट्टी के हाथी पर सवार माता महालक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर पति एवं पुत्र की दीर्घायु की कामना की। सुबह से शुरू हुआ पूजन-अर्चन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।चांदनी चौकसे ने व्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि महालक्ष्मी व्रत के पूर्व 16 दिनों तक दूर्वा (दूबी) से स्नान करने की परंपरा है। जो महिलाएं 16 दिन यह नियम नहीं कर पातीं, वे मुख्य पूजा के दिन ही 16 बार दूर्वा से स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं। पिपरिया सहित ग्रामीण अंचलों में भी महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजन कर प्रसाद वितरित किया।

बाजारों में रही रौनक, भजनों से किया रतजगा 

पर्व के चलते बाजारों में पूजन सामग्री की खूब खरीदारी हुई। माता लक्ष्मी का प्रिय आसन होने के कारण कमल के फूलों की विशेष मांग रही, जो बाजार में 15 से 20 रुपये प्रति फूल की दर से बिके। शाम होते ही घरों में ढोलक की थाप पर देवी गीतों और भजन-कीर्तन की गूंज सुनाई देने लगी। व्रती महिलाओं ने रात्रि जागरण (रतजगा) कर माता महालक्ष्मी का गुणगान किया और अगले दिन प्रात:काल विधि-विधान से विसर्जन कर व्रत का पारण किया।


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