15 साल से सड़क को तरस रहा औरिया गांव, ग्रामीणों में आक्रोश

15 साल से सड़क को तरस रहा औरिया गांव, ग्रामीणों में आक्रोश

बारिश में दलदल बन जाता है रास्ता, मरीजों और स्कूली बच्चों की बढ़ी मुसीबत

  • ग्रामीणों ने चेताया आगामी चुनाव में रोड नहीं, तो वोट नहीं
  • सड़क के अभाव में एंबुलेंस तक का पहुंचना मुश्किल

मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के बीजाडांडी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत समनापुर के पोषक ग्राम औरिया से सरकारी विकास के दावों पर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर सामने आई है। बीते 15 वर्षों से पक्की सड़क की बाट जोह रहे ग्रामीणों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने खुलकर अपना आक्रोश जाहिर करते हुए आगामी 2027 के चुनावों के लिए रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा बुलंद कर दिया है।जानकारी अनुसार गांव तक पक्की सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को रोजाना आवागमन में भारी मशक्कत करनी पड़ती है। इसका सबसे बुरा असर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, आपात स्थिति में गांव तक एंबुलेंस का पहुंचना भी बेहद मुश्किल हो जाता है। वहीं, मानसून के दौरान कच्चा रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से लगभग कट जाता है।

सिर्फ चुनाव में वोट मांगने आते हैं जनप्रतिनिधि 

आक्रोशित ग्रामीणों का आरोप है कि हर चुनाव के समय जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे कर वोट मांगने गांव पहुंच जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतते ही सड़क और पानी जैसी बुनियादी समस्याओं को भुला दिया जाता है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर डेढ़ दशक बीत जाने के बाद भी उनके गांव तक विकास की पक्की सड़क क्यों नहीं पहुंच पाई है।

मांग पूरी होने तक जारी रहेगा विरोध 

लगातार हो रही उपेक्षा से तंग आकर ग्रामवासियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक गांव में पक्की सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा और वे आने वाले चुनाव में मतदान का बहिष्कार करेंगे। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की इस चेतावनी के बाद प्रशासन की नींद कब खुलती है।


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