2 अक्टूबर की ग्राम सभाओं में सामुदायिक वन अधिकार का एजेंडा शामिल करना अनिवार्य
20 अक्टूबर तक सभी लंबित प्रकरणों के निराकरण के निर्देश
- वन अधिकार अधिनियम: जनजातीय कार्य विभाग ने सभी कलेक्टरों को जारी किए निर्देश
- समय-सीमा में सामुदायिक वन संसाधन के दावों का होगा निपटारा
2 अक्टूबर की ग्राम सभाओं में सामुदायिक वन अधिकार का एजेंडा अनिवार्य, 20 अक्टूबर तक लंबित प्रकरणों के निराकरण के आदेश जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव ने सभी कलेक्टरों को जारी किए निर्देश; पारंपरिक वनों के प्रबंधन और संरक्षण में ग्राम सभाओं की भूमिका होगी मजबूत
भोपाल/मंडला महावीर न्यूज 29. मध्यप्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग ने वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से संबंधित लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा द्वारा 1 अक्टूबर को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 2 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभाओं की बैठक के एजेंडे में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के विषय को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
20 अक्टूबर से पूर्व करना होगा लंबित मामलों का निपटारा
प्रमुख सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विगत 30 सितंबर 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के लंबित प्रकरणों के निराकरण पर विस्तृत चर्चा की गई थी। बैठक में लिए गए निर्णय के तहत सभी जिलों में लंबित प्रकरणों को 20 अक्टूबर 2026 से पूर्व अनिवार्य रूप से निराकृत करने का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही, जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि ग्रामवासियों के बीच सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों के संबंध में व्यापक जागरूकता एवं प्रचार-प्रसार करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कागजी कार्रवाई से हटकर निष्पक्ष प्रक्रिया पूरी करे प्रशासन:
राज कुमार सिन्हा शासन के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ’ के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता राज कुमार सिन्हा ने इसे वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के माध्यम से ही ग्राम सभाओं को अपने पारंपरिक वन क्षेत्रों के संरक्षण, प्रबंधन और उपयोग से जुड़े वास्तविक अधिकार प्राप्त होते हैं।
सिन्हा ने जोर देते हुए कहा कि शासन के इस निर्देश के बाद अब जिला प्रशासन, वन विभाग और संबंधित अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि ग्राम सभाओं को पूरी जानकारी उपलब्ध कराते हुए उनके दावों की निष्पक्ष प्रक्रिया पूरी करें।
फार्मेट ‘ग’ के माध्यम से एसडीएम को जमा करने होंगे दावे
प्रक्रिया की जानकारी देते हुए राज कुमार सिन्हा ने बताया कि वन अधिकार कानून 2006 की धारा 3(1)(झ) में स्पष्ट प्रावधान है कि पारंपरिक गांव की सीमा से लगे वनों का प्रबंधन एवं संरक्षण ग्राम सभा द्वारा किया जाएगा। इसके लिए ग्राम सभा को वन अधिकार कानून में निर्धारित ‘फार्मेट (ग)’ भरकर उपखंड स्तरीय समिति (एसडीएम) के समक्ष जमा करना होता है। उन्होंने मांग की है कि ग्राम सभाओं में दावेदार समुदायों को इस प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी जाए और 20 अक्टूबर की समय-सीमा के भीतर सभी लंबित दावों का पारदर्शी व नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित किया जाए।









