10 वर्ष से नलजल योजना बंद, 5 साल से अधूरा पड़ा पेयजल टंकी का निर्माण

सड़क, पेयजल और जर्जर स्कूल भवन से परेशान ग्रामीण

10 वर्ष से नलजल योजना बंद, 5 साल से अधूरा पड़ा पेयजल टंकी का निर्माण

  • जनसुनवाई में चंदा कर बस से पहुंचे 100 से अधिक ग्रामीण
  • कटंग सिवनी के ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
  • कलेक्टर ने दिया समस्या निराकरण का आश्वासन

मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला के विकासखंड निवास के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कटंग सिवनी के निवासी आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। शासन-प्रशासन द्वारा हर घर नल से जल पहुंचाने और बेहतर शिक्षा और पहुंच मार्ग के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। ग्राम कटंग सिवनी में पेयजल का गंभीर संकट है और सरकारी स्कूल की इमारत जर्जर हो चुकी है। ग्राम में सीसी मार्ग और नाली निर्माण का अभाव है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम में स्ट्रीट लाईट ना होने के कारण रात्रि में गांव की सड़के अंधेरे में विलीन हो जाती है, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों की अनदेखी से परेशान होकर अंतत: गांव वालों ने खुद ही मोर्चा खोलने का फैसला किया। अपनी समस्याओं को जिला प्रशासन तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने आपस में 50-50 रुपये का चंदा एकत्र किया और एक बस किराये पर लेकर करीब 100 ग्रामीण जिला मुख्यालय मंडला की जनसुनवाई में पहुंच गए।

 

5 साल से अधूरा पड़ा है पेयजल टंकी का कार्य

ग्राम कटंग सिवनी में पिछले 10 वर्षों से नल-जल योजना के कनेक्शन बंद पड़े हुए हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पानी की टंकी का निर्माण करीब 5 साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन आज तक वह पूरी नहीं हो सकी है। टंकी के नाम पर केवल कॉलम खड़े कर दिए गए हैं और पाइपलाइन बिछा दी गई है, लेकिन उसमें पानी की एक बूंद नहीं है। गर्मियों के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब ग्रामीणों को पीने का पानी लाने के लिए 2 किलोमीटर दूर तक पैदल जाना पड़ता है। मजबूरी में ग्रामीण कुएं का ऐसा गंदा पानी पीने को विवश हैं, जिसमें कीड़े पनप रहे हैं।

बारिश में टपकता है स्कूल, पन्नी तानकर पढ़ते हैं नौनिहाल 

गांव में शिक्षा की स्थिति भी बदहाल है। प्राथमिक और माध्यमिक शाला के भवन पूरी तरह से जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। बारिश के दिनों में स्कूल की छत से पानी टपकता है, जिसके कारण बच्चों को पन्नी लगाकर पढ़ाई करनी पड़ती है। कई बार पानी भर जाने से बच्चों को यहां-वहां भटकना पड़ता है और स्कूल में छुट्टी कर दी जाती है।

पंचायत प्रतिनिधियों पर लापरवाही और अनियमितता के आरोप 

जनसुनवाई में दिए गए आवेदन में ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम के सरपंच-सचिव द्वारा गांव के विकास कार्यों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सीसी रोड और नालियों के निर्माण में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। गांव में स्ट्रीट लाइटें भी कहीं लगाई गई हैं तो कहीं नहीं लगाई गई हैं। इसके अलावा ग्राम सभा की बैठकों में सरपंच और सचिव द्वारा पंचायत की आय-व्यय की कोई जानकारी ग्रामीणों को नहीं दी जाती है।

कलेक्टर ने दिया समस्या निराकरण का आश्वासन 

पंचायत स्तर पर कई बार शिकायत करने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो ग्रामीण चंदा कर गाड़ी और बस बुक करके मंडला कलेक्टर के पास जनसुनवाई में पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं के शीघ्र निवारण और स्वयं निरीक्षण करने की मांग की। कलेक्टर ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें आश्वासन दिया है कि जल्द ही उनकी समस्याओं का निराकरण कर दिया जाएगा।

इनका कहना है

हम अपनी समस्याओं को लेकर यहां आए हैं। हमने गांव में 50-50 रुपये चंदा इक_ा किया और बस करके लगभग 100 लोग जनसुनवाई में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने आए। हमारे यहां पानी की समस्या है, स्कूल मरम्मत के अभाव में जर्जर है और बरसात में बच्चे पन्नी लगाकर पढ़ते हैं। कलेक्टर साहब ने हमें 7 दिन के अंदर समस्या हल करने का आश्वासन दिया है।


पंचम सिंह कुलस्ते, ग्रामीण

हम पानी की समस्या से बहुत परेशान हैं। हमारे पास बिल्कुल पानी नहीं है, गर्मी में 2 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। अभी भी कुएं का इतना गंदा और कीड़े वाला पानी हम छानकर पी रहे हैं। स्कूल की इमारत जर्जर हो गई है, पानी गिरता है तो बच्चे यहां-वहां भटकते हैं, जिससे शिक्षकों को मजबूरी में छुट्टी करनी पड़ती है। पानी की टंकी 5 साल से अधूरी पड़ी है, सिर्फ कॉलम खड़े हैं, पाइपलाइन डल गई है लेकिन पानी नहीं है। हमारी सुनवाई नहीं हो रही थी, इसलिए हम सब चंदा करके गाड़ी से यहां आए हैं।


विद्या विश्वकर्मा, ग्रामीण

हम 100-200 लोग चंदा करके बस से जनसुनवाई में आए हैं। स्कूल में पानी टपकता है जिससे बच्चे भटकते हैं और पढ़ाई नहीं हो पाती। कलेक्टर साहब ने कहा है कि 7 दिन के अंदर आएंगे। गांव में पानी के लिए हम बहुत परेशान हैं, कहीं कुएं से तो कहीं से घूम-घूम कर पानी लाते हैं। टंकी के नाम पर सिर्फ कॉलम खड़े हैं, वो पूरी तरह से अधूरी है।


कौशल्या बैरागी, ग्रामीण


Leave a Comment