माँ नर्मदा को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए कृत्रिम कुंडों में ही होगा गणेश विसर्जन

माँ नर्मदा को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए कृत्रिम कुंडों में ही होगा गणेश विसर्जन

पीओपी मूर्तियों, नशे और फिल्मी गानों से बचने का किया आह्वान

  • समिति ने जारी किए पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति के निर्देश
  • मंडला में मां नर्मदा सुमंगल कार्य योजना की पहल

मंडला महावीर न्यूज 29.  गणपति उत्सव के पावन पर्व पर मंडला जिले की जीवनदायिनी मां नर्मदा को प्रदूषण मुक्त और निर्मल बनाए रखने के लिए मां नर्मदा सुमंगल कार्य योजना द्वारा जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। समिति और स्वयंसेवकों ने धर्मप्रेमी नागरिकों से नर्मदा घाटों की मुख्य जलधारा में मूर्तियों का विसर्जन न करने का आह्वान किया है।श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन ने रपटा घाट, रंगरेज़ घाट और संगम घाट समेत प्रमुख स्थानों के समीप पवित्र कृत्रिम कुंडों का निर्माण किया है। इन कुंडों में नर्मदा का पवित्र जल ही भरा गया है। समिति ने बताया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां पानी में नहीं घुलतीं और रासायनिक रंग जल को विषैला बनाते हैं, इसलिए इनका विसर्जन प्राकृतिक जल स्रोतों में नहीं किया जाना चाहिए। नागरिकों से पीओपी को ना, मिट्टी को हाँ का संकल्प लेकर भविष्य में केवल प्राकृतिक मिट्टी की मूर्तियां स्थापित करने का आग्रह किया गया है।समिति ने कहां कि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों और मरकरी, लेड एवं केमिकल वाले रंगों से बचें, क्योंकि इससे पानी जहरीला हो जाता है। प्रदूषण कम करने के लिए फ्लैक्स के स्थान पर गत्ता, कागज या कपड़े के बैनर का उपयोग करें। 20-25 घरों में सामूहिक रूप से गणेश प्रतिमा रखकर पूजन करें और नदी या तालाब की बजाय सामूहिक विसर्जन कुंड में ही प्रतिमा विसर्जित करें। घर पर छोटा कुंड बनाकर प्रतिमा विसर्जन करने और उसमें किसी पेड़ का बीज रोपने की भी सलाह दी गई है, जिससे हर वर्ष पेड़ उत्पन्न हों। विसर्जन समारोह में फिल्मी या फूहड़ गानों के बजाय केवल लोकगीतों एवं भक्ति गीतों का उपयोग करें। उत्सव के समय शराब आदि का प्रयोग न करें और नशा मुक्ति का संकल्प लें। पर्यावरण, नदी, और जीवों के संरक्षण के लिए संकल्प लें और इसके लिए किए जा रहे सामाजिक प्रयासों को सम्मान दें।


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