3.59 लाख का भुगतान कर सरकारी खजाने को लगाया चूना
ग्राम पंचायत समनापुर में एलईडी स्ट्रीट लाइट घोटाला
- कागजों में 50 लाइटों की खरीद, गांवों में खरीदी से कम लगे
- 1500 की लाइट 7 हजार में दिखाकर किया बड़ा खेल
- कच्चे हस्तलिखित बिल में रेट का कॉलम भी खाली
मंडला महावीर न्यूज 29. जनपद पंचायत बीजाडांडी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत समनापुर में विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के नाम पर शासकीय राशि के बंदरबांट का बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीण क्षेत्रों की गलियों को रोशनी से जगमग करने के उद्देश्य से खरीदी गई एलईडी स्ट्रीट लाइटों में पंचायत के जिम्मेदारों ने जमकर भ्रष्टाचार का खेल रचा है। कागजों में 50 सोलर लाइटों की खरीद दिखाकर करीब 3 लाख 59 हजार रुपये का भारी-भरकम बिल पास करवा लिया गया, जबकि धरातल पर 50 लाईट से कम ही ग्राम में लगाई गई हैं। इतना ही नहीं खुले बाजार में करीब एक हजार से दो हजार रुपये तक में मिलने वाली हल्की व घटिया किस्म की एलईडी लाइटों को 7 हजार रुपये से अधिक दर पर दिखाकर शासकीय खजाने में भारी सेंध लगाई गई है।
जानकारी अनुसार ग्राम पंचायत समनापुर के कार्यक्षेत्र में पांच गांव ग्राम समनापुर, ग्राम चौकी, चितौरा, ओरिया और वनग्राम चौकी आते हैं। पंचायत द्वारा जबलपुर की एक फर्म से एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीदी का बिल तैयार कराया गया। बिल में साफ तौर पर 50 नग एलईडी स्ट्रीट लाइट की आपूर्ति और फिटिंग दर्ज है। लेकिन जब मौके की पड़ताल की गई, तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। सूत्रों ने बताया कि ग्राम समनापुर, ग्राम चौकी, चितौरा, ओरिया और वनग्राम चौकी में 50 एलईडी स्ट्रीट लाइट लगनी थी, लेकिन इससे कम ही लाईट लगाई गई। कुल मिलाकर पांचो गांवों में 50 से कम एलईडी स्ट्रीट लाइट खंभों पर नजर आ रही है, लेकिन कई स्थानों में अंधेरा आज भी है। सवाल यह उठता है कि जब 50 लाइटों का पूरा भुगतान फर्म को किया गया तो कम लाईट क्यों लगाई गई और उच्च क्वालिटी की खरीदी के बावजूद सस्ती लाईट से समझौता क्यों किया गया। क्या जिम्मेदार महंगी एलईडी स्ट्रीट लाइट कागजों में ही जलाकर बजट हजम कर लिया गया है।
कच्चे बिल पर लाखों का खेल, प्रति नग दर का कॉलम गायब
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा संदेहास्पद पहलू वह बिल है जिसके आधार पर यह राशि स्वीकृत हुई है। जबलपुर की फर्म वंश सोलर एनर्जी के नाम से काटे गए बिल में न तो कोई कंप्यूटराइज्ड जीएसटी इनवॉइस है और न ही नियमानुसार प्रति लाइट की दर दर्ज की गई है। 50 लाइटों के आगे प्रति नग दर का कॉलम पूरी तरह खाली छोड़ दिया गया और सीधे कुल राशि 3 लाख 3 हजार 550 रूपए लिख दी गई। इसके ऊपर 18 प्रतिशत जीएसटी 54 हजार 600 रूपए जोड़कर कुल 3 लाख 59 हजार रूपए का बिल थमा दिया गया। यदि इसका औसत निकाला जाए, तो एक लाइट की कीमत करीब 7 हजार 180 रूपए आती है।
बाजार में 1500 की लाइट, बिल में वसूली चौगुनी रकम
इलेक्ट्रिकल और सोलर बाजार के जानकारों ने बताया कि खंभों पर जो प्लास्टिक और एबीएस बॉडी वाली सामान्य इंटीग्रेटेड ऑल-इन-वन एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं, वे थोक बाजार में 1200 से 2000 रुपये के बीच आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। इन लाइटों में सोलर पैनल, बैटरी और सेंसर सब कुछ एक ही ढांचे में इनबिल्ट होता है, जिसके लिए अलग से किसी तार या केबलिंग की आवश्यकता नहीं होती। इसके बावजूद बिल में मल्टी कोर फ्लेक्सिबल केबल और थ्री कोर वायर की आपूर्ति का फर्जी मद जोड़कर अलग से राशि जोड़ी गई है। इसके अलावा लाइटों को मानक जीआई पाइप या एंगल ब्रैकेट में लगाने के बजाय बिजली के चालू सीमेंट पोलों पर लोहे की काम चलाऊ पट्टियों से बांध दिया गया है, जो किसी भी तकनीकी मानक पर खरा नहीं उतरता।
ग्रामीणों ने की जांच और रिकवरी की मांग
ग्राम पंचायत समनापुर के सचिव और सरपंच के हस्ताक्षर व सील से प्रमाणित इस बिल ने पंचायत में चल रहे वित्तीय भ्रष्टाचार की पोल खोल कर रख दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी मद का दुरुपयोग कर घटिया सामग्री खरीदी गई और बची हुई सामग्री व राशि को मिलीभगत से डकार लिया गया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, सीईओ जिला पंचायत और लोकायुक्त से मांग की है कि इस खरीद की भौतिक सत्यापन कराकर निष्पक्ष जांच की जाए और फर्म के जीएसटी खाते की पड़ताल हो और फर्जी बिलिंग करने वाले जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के खिलाफ गबन का मामला दर्ज कर राशि की वसूली की जाए।










