मंडला में शिक्षा सत्र के बीच युक्तियुक्तकरण पर बवाल
बेरपानी और रतनपुर चौकी के पालकों ने खोला मोर्चा, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
- शिक्षकों के अटैचमेंट समाप्त होने से स्कूलों में पढ़ाई चौपट होने का खतरा
- पालक महासंघ ने आदेश को ग्रीष्मकालीन अवकाश तक रोकने की उठाई मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले में शिक्षा सत्र के बीच लागू की गई युक्तियुक्तकरण और शिक्षकों की अटैचमेंट समाप्ति की नीति का भारी विरोध शुरू हो गया है। बच्चों की बाधित होती पढ़ाई से आक्रोशित ग्राम बेरपानी और नारायणगंज रतनपुर चौकी के पालकों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने 15 सितंबर को कलेक्टर और सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है।
बताया गया कि अधिकारियों द्वारा समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया है, लेकिन जिले के कई शिक्षक विहीन स्कूलों में इस आदेश से बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पालकों का कहना है कि बीच सत्र में शिक्षकों को मूल शाला भेजने से बच्चों का सिलेबस अधूरा रह जाएगा और अतिथि शिक्षकों पर भी बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है।
बेरपानी स्कूल पर संकट
बरगी बांध विस्थापित और जंगल में बसे 1000 की आबादी वाले आदिवासी ग्राम बेरपानी में शिक्षा व्यवस्था चरमराने लगी है। बताया गया कि शासकीय एकीकृत माध्यमिक शाला बेरपानी में 111 बच्चे दर्ज हैं। यहां 6 पद स्वीकृत हैं, लेकिन मात्र 2 शिक्षक ही पदस्थ हैं। स्कूल खुलने के बाद से यहां गणित का शिक्षक नहीं था। काफी प्रयासों के बाद शिक्षक अवध बिहारी मिले थे, लेकिन नए आदेश के तहत उन्हें भी हटाया जा रहा है। पालकों ने कहा है कि इस दुर्गम इलाके में कोई आना नहीं चाहता, ऐसे में एक शिक्षक के भरोसे बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी।
बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा असर
बताया गया कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय रतनपुर चौकी में पदस्थ प्राचार्य मनोज कुमार को सत्र के बीच अचानक हटा दिया गया है। इससे स्कूल में रहकर पढ़ाई कर रहे करीब 400 आवासीय बच्चों की शिक्षा, भोजन और अनुशासन व्यवस्था बिगडऩे की आशंका पैदा हो गई है। पालकों ने प्राचार्य पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए उनकी तत्काल बहाली और पीटीए के समक्ष निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पालक महासंघ ने की प्रशासन से अपील
पालक महासंघ मंडला ने प्रशासन की इस असमय व्यवस्था की कड़ी निंदा की है। महासंघ का कहना है कि सत्र के बीच में ऐसे फेरबदल से बच्चों के भविष्य, अतिथि शिक्षकों के रोजगार और प्रभावित शिक्षकों की मानसिक स्थिति पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ेगा। महासंघ ने छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन से मांग की है कि इस आदेश को आगामी ग्रीष्मकालीन अवकाश तक के लिए शिथिल कर दिया जाए।









