गौ सेवा ही परम धर्म, भगवान को लगा 56 भोग

गौ सेवा ही परम धर्म, पिपरिया में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोविंद नाम की महिमा का बखान

  • भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान को लगा 56 भोग
  • प्रतिदिन हो रहा पार्थिव शिवलिंग निर्माण व रुद्राभिषेक

मंडला महावीर न्यूज 29. निवास के समीप ग्राम पिपरिया में चल रही श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवे दिन कथा व्यास पंडित अनुज कृष्णम महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का बखान करते हुए श्रीकृष्ण का नाम गोविंद कैसे पड़ा इसका वृत्तांत विस्तार से सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण को गायों से विशेष स्नेह था और गौ माता द्वारा दिया गया गोविंद नाम भगवान को अत्यंत प्रिय है। उन्होंने कथा का वाचन करते हुए बताया कि गो सेवा करना प्रत्येक सनातनी का परम धर्म है, और हर घर में गौशाला और कम से कम एक गाय रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि गाय के शरीर में 33 कोटी देवी-देवताओं का निवास होता है, जिसके पूजन दर्शन से 33 कोटी देवी-देवताओं को पूजने जैसा फल प्राप्त होता है।कथा में आगे गाय के गोबर और दूध के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गाय के गोबर से रसोई को लीपकर बनाया गया भोजन स्वयं भगवान गोविंद के महाप्रसाद जैसा परम पुण्य फलदायी होता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों को गो माता का दूध पिलाना चाहिए, जिससे वे स्वस्थ और मेधावी बनेंगे। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि घर में गौशाला होने से बहुत से वायरसों से मुक्ति मिलती है, जिससे घर के लोग स्वस्थ और सुखी रहते हैं।

56 व्यंजनों का लगाया भोग 

श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवे दिन भगवान श्रीकृष्ण को श्रोताओं द्वारा खीर, पुरी, लड्डू, हलुवा समेत 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया।

प्रतिदिन चल रहा रुद्री निर्माण व रुद्राभिषेक 

बताया गया कि प्रात: भागवत पूजन के साथ प्रतिदिन नाना प्रकार केअनुष्ठान किये जा रहे हैं इसी कड़ी में भगवान शिव को समर्पित पार्थिव रुद्री निर्माण कराया और रुद्राभिषेक प्रतिदिन किया जा रहा हैं इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रृद्धालुओं ने अपनी उपस्थित हो रहे हैं।



 

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