अहमदपुर चौराहा बना ‘डेथ जोन’

अहमदपुर चौराहा बना ‘डेथ जोन’

ब्रिज की मांग को लेकर युवाओं का हल्लाबोल, उग्र आंदोलन की चेतावनी

NHAI की वादाखिलाफी से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा; मुख्यमंत्री के नाम नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

मंडला महावीर न्यूज 29.  नेशनल हाईवे-30 पर स्थित अंजनियां चौकी के अंतर्गत अहमदपुर चौराहा अब ‘हादसों का चौराहा’ बन चुका है। पिछले 10 वर्षों से लगातार हो रही मौतों और प्रशासन की अनदेखी से तंग आकर युवा शक्ति संगठन ने बुधवार को मोर्चा खोल दिया। संगठन ने चौराहे के समीप शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे भूख हड़ताल और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

10 साल, सैकड़ों हादसे: ‘ब्लैक स्पॉट’ बना खूनी जंक्शन

जबलपुर-रायपुर नेशनल हाईवे पर मेढाताल घाट (छुई घाटी) से अहमदपुर मांद चौराहा तक का हिस्सा तकनीकी खामियों के कारण बेहद खतरनाक हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि हाईवे निर्माण के दौरान पुरानी सड़क के कटाव की बजाय सीधे ढलान बना दी गई और यहाँ ओवरब्रिज भी नहीं दिया गया। इसी लापरवाही का नतीजा है कि आए दिन यहाँ भीषण सड़क हादसे हो रहे हैं।

हाल ही में 8 दिसंबर की रात एक अनियंत्रित ट्रक ने पिकअप को टक्कर मार दी थी, जिसमें तीन लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से ही क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।


प्रशासनिक आश्वासनों की खुली पोल

युवा शक्ति संगठन के सदस्यों ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपकर वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की गई थी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि 7 दिनों के भीतर NHAI यहाँ लाइट, सांकेतिक बोर्ड और मानक ब्रेकर की व्यवस्था करेगा। लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी धरातल पर कोई काम शुरू नहीं हुआ, जिससे नाराज होकर युवाओं को सड़क पर उतरना पड़ा।

संगठन की प्रमुख मांगें:

  • मेढाताल घाट से बड़ा देव मंदिर तक ओवरब्रिज का अतिशीघ्र निर्माण।
  • पूरे मार्ग पर हाईमास्क लाइट, रेडियम और स्पष्ट सांकेतिक बोर्ड की स्थापना।
  • वर्तमान में बनाए जा रहे अमानक ब्रेकरों की जगह व्यवस्थित और मानक ब्रेकर का निर्माण।

आध्यात्मिक विरोध: हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ

प्रदर्शन के दौरान एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। युवाओं ने दोपहर में धरना स्थल पर ही हनुमान चालीसा का पाठ किया। वहीं, शाम को सुंदरकांड का भव्य आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य उन बेजुबान जानवरों और इंसानों की आत्मा को शांति प्रदान करना था जिन्होंने इस ‘खूनी सड़क’ पर अपनी जान गंवाई है।

आंकड़ों में छुई घाटी की भयावहता (2019-2024)

पुलिस विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, यह ब्लैक स्पॉट मौतों का पर्याय बन चुका है:

  • 2019: 05 हादसे, 05 मौतें, 40 घायल (05 मवेशियों की भी मौत)।
  • 2020: 04 हादसे, 02 मौतें, 08 घायल।
  • 2023: 08 हादसे, 05 मौतें, 12 घायल (18 मवेशियों की मौत)।
  • 2022-2024: कुल 07 बड़े हादसे और 03 मौतें दर्ज की गईं।

नायब तहसीलदार अजय श्रीवास्तव ने धरना स्थल पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्राप्त किया और युवाओं को उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए धरना समाप्त करवाया। हालांकि, संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल एक दिवसीय सांकेतिक प्रदर्शन था, असली लड़ाई 7 दिन बाद शुरू होगी।


रिपोर्टर- गर्जेन्द्र पटेल, अंजनिया, मंडला ✍️



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