शतचंडी मैदान में हुआ अयोध्या जैसा उत्सव, निवास में झूमे भक्त

शतचंडी मैदान में हुआ अयोध्या जैसा उत्सव, निवास में झूमे भक्त

  • श्रीराम कथा के चौथे दिन महामंडलेश्वर स्वामी आत्मानंद गिरि ने सुनाया श्रीराम जन्म का दिव्य वर्णन
  • भय प्रकट कृपाला की महाआरती से गूंज उठा पंडाल

मंडला महावीर न्यूज 29. निवास नगर के शतचंडी मैदान में चल रही संगीतमय श्री राम कथा के चौथे दिन जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी आत्मानंद गिरि महाराज द्वारा श्रीराम जन्म की दिव्य कथा का वर्णन किया गया। इस दौरान कथा में मौजूद श्रद्धालु भजनों पर जमकर झूमे। महामंडलेश्वर स्वामी आत्मानंद गिरि ने बताया कि किस प्रकार महाराज दशरथ के यहां महारानी कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा को पुत्र योग का शुभ संयोग बना। उन्होंने कहा कि महाराज के चारों पुत्रों के जन्म से संपूर्ण राज्य में आनंद का माहौल था। खुशी में हर ओर गंधर्व गान और नृत्य होने लगा, देवताओं ने पुष्प वर्षा की तथा महाराज दशरथ ने ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा और दरबारियों को रत्न आभूषण भेंट कर आशीर्वाद लिया।

भगवान राम के जन्म के वर्णन के साथ ही अयोध्या में मचे आनंद का वृत्तांत सुनाया, जिसमें राजा दशरथ ने संपूर्ण नगर में बधाइयाँ दीं और मिठाई बंटवाई। इस अवसर पर कथा पंडाल का माहौल भी पूरी तरह से उत्सवमय हो गया। पूरा पंडाल भय प्रकट कृपाला, दीनदयाला के महाआरती गायन से गुंजायमान हो उठा। भगवान श्री राम की बाल झांकी के साथ रंगीन आतिशबाजी और बैंड बाजों की धुन पर श्रद्धालु जमकर झूमे।

कथावाचक ने जन्म के विशिष्ट समय का भी सूक्ष्म वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले महाराज दशरथ की बड़ी रानी कौशल्या ने जो शिशु को जन्म दिया, वह बेहद ही कांतिवान, नील वर्ण और तेजोमय था। इस शिशु का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था। इस समय सूर्य, मंगल, शनि, बृहस्पति तथा शुक्र अपने-अपने उच्च स्थानों में विराजित थे और कर्क लग्न का उदय हुआ था। इसके बाद शुभ नक्षत्रों में कैकेयी और सुमित्रा ने भी अपने-अपने तेजस्वी पुत्रों को जन्म दिया। अंतत: कथा समापन होने के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।


 

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