क्षमा से ब्रह्मचर्य तक की यात्रा, धर्म की गंगा में डूबे श्रद्धालु

पिंडरई में दशलक्षण महापर्व का भव्य शुभारंभ

  • क्षमा से ब्रह्मचर्य तक की यात्रा, धर्म की गंगा में डूबे श्रद्धालु
  • मुनिश्री नीरजसागर और निर्मदसागर की चरण संनिधि में दशलक्षण महापर्व शुरू

मंडला महावीर न्यूज 29. पिंडरई में विद्या-समय-रूपी नीरज की निर्मद वर्षा पिछले दो माह से हो रही है, और इसी कड़ी में दशलक्षण महापर्व का शुभारंभ हुआ। सकल दिगंबर जैन समाज पिंडरई द्वारा आयोजित यह पर्व मुनिश्री नीरजसागर और मुनिश्री निर्मदसागर की चरण संनिधि में मनाया जा रहा है, जहाँ क्षमा आदि दस धर्मों की गंगा बह रही है।

दशलक्षण धर्मों में पहला धर्म उत्तम क्षमा का है। पर्व के पहले दिन की शुरुआत प्रभात फेरी से हुई, जिसके बाद विद्याश्री परिवार की ओर से सभी को प्रभावना बांटी गई। इसके बाद, श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा और सामूहिक पूजन आनंद के साथ संपन्न हुआ। सुबह की बेला में पूज्य मुनिद्वय की देशना (प्रवचन) का लाभ सभी को मिला।

मुनिश्री निर्मदसागर ने बताया कि दशलक्षण पर्व बीज से वृक्ष तक की यात्रा है। उन्होंने समझाया कि क्षमा रूपी धरती पर मृदु माटी के संपर्क से एक बीज का रोपण होता है, जिससे आर्जव रूपी पौधा बाहर आता है। इस पौधे के साथ अशुचिता रूपी खरपतवार भी आती है, जिसे हटाना जरूरी है। आर्जव रूपी पौधे को सत्य रूपी सूर्य के दर्शन होते हैं, फिर संयम रूपी फूल खिलते हैं और तप की सुगंध चारों ओर फैलती है। अंत में त्याग रूपी फल लगते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एकदेश त्याग करना त्याग धर्म है और सर्वदेश त्याग करने को ही आकिंचन धर्म कहते हैं। सर्वदेश त्यागी ब्रह्म में लीन हो जाया करते हैं, और इसी को ब्रह्मचर्य धर्म कहते हैं।

धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन

साधु सेवा समिति के मीडिया प्रभारी ऋषभ जैन ने बताया कि मध्याह्न में संस्कृत भाषा के प्रथम ग्रंथ तत्त्वार्थसूत्र का वाचन बहन सान्या द्वारा किया गया। इसके बाद पूज्य मुनिश्री नीरजसागर की कक्षा में तत्त्वार्थसूत्र जी के प्रथम अध्याय की अर्थ सहित व्याख्या को सभी ने समझा। शाम के समय गुरु भक्ति, पापों के प्रक्षालन हेतु प्रतिक्रमण और आरती के साथ पर्व का पहला दिन धर्म ध्यान में व्यतीत हुआ।



 

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