प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बवलिया की बदहाली पर मानवाधिकार आयोग सख्त, सीएमएचओ से मांगा जवाब
- जर्जर भवन में जान जोखिम में डालकर हो रहे प्रसव
- 1987-88 से बना स्वास्थ्य केंद्र खतरे की घंटी
मंडला महावीर न्यूज 29. मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने हाल ही में विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित मामलों को संज्ञान में लिया है, जिनमें प्रथम दृष्टया मानव अधिकार उल्लंघन का मामला सामने आया है। इन 05 मामलों में से एक मामला मंडला जिले के नारायणगंज विकासखंड में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बवलिया का है, जिसकी बदहाली पर आयोग ने संबंधितों से जवाब तलब किया है। यह जानकारी मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग-मित्र शिकायत प्रकोष्ठ शाखा मंडला से प्राप्त हुई है।
बताया गया कि वर्ष 1987-88 में निर्मित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बवलिया का भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। यह स्थिति यहाँ इलाज कराने आने वाले मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों दोनों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि भवन के प्रसव कक्ष की छत से लगातार पानी टपकने के बावजूद गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के बाद इसी कक्ष में रुकना पड़ता है। यह स्थिति जच्चा-बच्चा दोनों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है और मानव अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।
बताया गया कि इस गंभीर मामले को संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष (कार्यवाहक) राजीव कुमार टंडन ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मंडला से जवाब मांगा है। आयोग ने सीएमएचओ को इस मामले की विस्तृत जांच कराने और व्यवस्था में सुधार के लिए की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन एक माह के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। बताया गया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बवलिया की यह स्थिति ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती है और सरकार के स्वास्थ्य दावों पर प्रश्नचिन्ह लगा रही है। आयोग के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद है कि इस स्वास्थ्य केंद्र की दशा सुधरेगी और मरीजों को सुरक्षित माहौल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल पाएंगी।
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